दिल्ली विधानसभा में आज राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव पारित होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से एनपीआर और एनआरसी को वापस लेने की अपील की.

पीटीआई के मुताबिक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में कहा, ‘राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में कहा था की मेरी सरकार एनआरसी लाएगी. गृह मंत्री ने भी यही कहा है..एनपीआर पर विवाद इसलिए है कि गृह मंत्री ने कहा था कि पहले सीएए आएगा, फिर एनपीआर और फिर एनआरसी. तीनों कानून एक दूसरे से जुड़े हैं. देश के सारे लोगों की नागरिकता पर ये सवाल उठाएंगे, कागज नहीं दिखाने पर डिटेंशन सेंटर में भेज देंगे.’

केजरीवाल ने आगे कहा, ‘अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मेरे पास भी जन्म प्रमाण पत्र नहीं है. मेरी बीवी के पास भी नहीं है, मेरे मां-बाप के पास भी नहीं है. बस बच्चों के पास हैं. तो क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री और उनके परिवार को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा? मेरी पूरी कैबिनेट के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है.’

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों से कहा कि वे दिखाएं कि क्या उनके पास सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र हैं? केजरीवाल ने विधानसभा में विधायकों से कहा कि यदि उनके पास जन्म प्रमाण पत्र हैं, तो वे हाथ उठाएं. इसके बाद दिल्ली विधानसभा के 70 सदस्यों में से केवल नौ विधायकों ने हाथ उठाए. इस पर उनका कहना था, ‘सदन में 61 सदस्यों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं. ऐसे में क्या उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा?’

दिल्ली से पहले भी कुछ राज्यों ने एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए हैं. इनमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले पश्चिम बंगाल और लेफ्ट पार्टी नीत केरल और भाजपा के समर्थन वाली बिहार सरकार भी शामिल है. बीती 12 मार्च को केंद्र में भाजपा की सहयोगी एआईएडीएमके ने भी तमिलनाडु में एनपीआर लागू करने से इनकार कर दिया है.