1-अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है. बीबीसी हिंदी पर पर वरिष्ठ पत्रकार आलोक जोशी मानते हैं कि सरकार को इस वक्त अपने लोभ पर नियंत्रण रखना चाहिए था. उनके मुताबिक सरकार यही पैसा आम जनता, छोटे कारोबारियों और बड़े उद्योगपतियों के हाथों में जाने देती तो अर्थव्यवस्था में रफ़्तार लाने के उस मौक़े का सही इस्तेमाल कर सकती थी जिसका इंतज़ार ये देश कई सालों से कर रहा है.

सस्ते तेल का फ़ायदा मोदी सरकार भारतीयों को क्यों नहीं दे रही?

2-लंबे समय तक चली अटकलबाजियों के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया आखिरकार कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो ही गई. द प्रिंट हिंदी पर अपने इस लेख में योगेंद्र यादव मानते हैं कि असली सवाल यह नहीं है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस को धोखा दिया या नेहरू-गांधी पार्टी ने उनकी नहीं सुनी. संकट इससे ज्यादा गहरा है.

कांग्रेस अपने ऐतिहासिक कर्तव्य में विफल हो रही है वहीं भाजपा को हराने के रास्ते में भी अड़चन बनकर खड़ी है

3-चीन से शुरू हुआ नॉवल कोरोना वायरस अब 132 देशों तक पहुंच चुका है. लेकिन चीन के करीब स्थित ताइवान पर इसका इतना बड़ा असर नहीं दिखा है. जनवरी में जब संक्रमण शुरू हुआ था तब जानकारों का मानना था कि चीन के बाद सबसे ज्यादा मामले ताइवान में ही देखने को मिलेंगे. लेकिन चीन में जहां 80 हजार से भी ज्यादा मामले सामने आए हैं, ताइवान ने इसे सिर्फ 50 मामलों पर ही रोक रखा है. ऐसा कैसे हुआ? डॉयचे वेले हिंदी पर विलियम यांग और ईशा भाटिया की रिपोर्ट

ताइवान ने कैसे रोक लिया कोरोना का प्रकोप?

4-बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ‘बात बिहार की’ नाम से एक अभियान की शुरुआत की है. इसे लेकर उन पर एक एफआईआर दर्ज कराई गई है. इसमें प्रशांत किशोर पर आइडिया चुराने का आरोप लगाया गया है. इसे पूरे मामले को लेकर द वायर हिंदी पर उमेश कुमार रे की रिपोर्ट.

विवादों के घेरे में क्यों है प्रशांत किशोर का ‘बात बिहार की’ अभियान?

5-दिल्ली हिंसा को लेकर बीते दिनों सोशल मीडिया में कई ऐसी जानकारियां फैलाई गई जिनसे तनाव की स्थिति बरकरार रखी जा सके. इस सिलसिले में कई वीडियो और तस्वीरें शेयर की गईं. अपनी इस रिपोर्ट में ऑल्ट न्यूज़ ने ऐसे कुछ दावों की जांच कर उनकी सच्चाई लोगों के सामने रखी है.

RSS कार्यालय या ताहिर हुसैन का घर, कहां से बरामद हुआ हथियारों का भंडार?