मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के भविष्य को लेकर सस्पेंस जारी है. सबकी नजरें विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति की तरफ लगी हैं जिन्हें विश्वासमत को लेकर फैसला करना है. इससे ही 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार का बने रहना या जाना तय होना है. हालांकि आज विधानसभा की कार्यवाही की जो सूची है उसमें विश्वासमत का कोई जिक्र नहीं है. इसमें सिर्फ राज्यपाल के अभिभाषण और उस पर धन्यवाद प्रस्ताव का उल्लेख किया गया है.

इससे पहले रविवार को एनपी प्रजापति ने कहा था कि उनकी बड़ी जिंचा कोरोना वायरस को लेकर है. उनका यह बयान इन अटकलों के बीच आया कि सरकार कोरोना वायरस से उपजे हालात को विश्वासमत टालने के लिए इस्तेमाल कर सकती है. कल देर रात मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की थी. खबरों के मुताबिक राज्यपाल ने उनसे अपने अभिभाषण के तुरंत बाद विश्वासमत साबित करने को कहा. इसके बाद मीडिया से बातचीत में कमलनाथ ने कहा कि विश्वासमत पर फैसला विधानसभा अध्यक्ष को करना है.

कमलनाथ सरकार पर यह संकट 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद आया. ये सभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं. विधानसभा अध्यक्ष ने अभी तक इनमें से सिर्फ छह के इस्तीफे स्वीकार किए हैं. यानी अब विधानसभा सदस्यों की संख्या 122 है और बहुमत का आंकड़ा 112. विपक्षी भाजपा के पास 107 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास 108.