सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 12 घंटे के भीतर विश्वासमत परीक्षण की भाजपा की मांग वाली याचिका को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ और विधानसभा सचिव से जवाब मांगा है. शीर्ष अदालत अब कल इस मामले की सुनवाई करेगी. इससे पहले राज्यपाल लालजी टंडन ने सरकार को विश्वासमत साबित करने के लिए मंगलवार यानी आज तक की समयसीमा दी थी. लेकिन विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कोरोना वायरस से उपजे हालात का हवाला देकर कल ही 26 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी. इसके खिलाफ भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.

कमलनाथ सरकार पर यह संकट 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद आया. ये सभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं. विधानसभा अध्यक्ष ने अभी तक इनमें से सिर्फ छह के इस्तीफे स्वीकार किए हैं. उधर, 16 विधायकों ने भी उनसे अपने इस्तीफे मंजूर करने की मांग की है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मामले में उन्हें भी एक पक्ष बनाने का अनुरोध किया था जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया. फिलहाल मध्य प्रदेश में विधानसभा सदस्यों की प्रभावी संख्या 122 है और बहुमत का आंकड़ा 112. विपक्षी भाजपा के पास 107 विधायक हैं जबकि कांग्रेस के पास 108. दोनों अपने-अपने पास बहुमत होने का दावा कर रहे हैं.