एजीआर बकाया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कड़ी फटकार लगाई है. उसने कहा है कि इस मामले में बकाया का फिर से आकलन का सुझाव अदालत को मूर्ख बनाने जैसा है और वह इसकी मंजूरी देने वाले अधिकारी को नहीं बख्शेगी. सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि यह शीर्ष अदालत की प्रतिष्ठा का सवाल है. अदालत ने कहा, ‘क्या कंपनियों को ये लगता है कि वे ज्यादा ताकतवर हैं.’

दरअसल एजीआर बकाया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलिकॉम कंपनियों को एक साथ सरकार को 1.47 लाख करोड़ रु के भुगतान का आदेश दिया था. पहले कंपनियों ने इसमें असमर्थता जताई और सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका लगाई जो खारिज हो गई. इसके बाद भी काफी समय तक भुगतान नहीं हुआ तो सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी. इसके बाद कंपनियों ने आंशिक भुगतान किया है. सरकार सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध कर रही है कि यह रकम बहुत ज्यादा है और अदालत कंपनियों को इसे 20 साल की समयावधि में चुकाने की इजाजत दे दे. उसने यह भी सुझाव दिया है कि बकाए का फिर से आकलन किया जा सकता है. उसका कहना है कि यह ग्राहकों सहित सभी पक्षों के हित में है.

इससे पहले वोडाफोन-आइडिया ने कहा था कि एक साथ सारा बकाया चुकाने की नौबत आई तो उसे अपनी दुकान समेटनी पड़ेगी. इस मामले में पेनल्टी और भुगतान में देरी पर ब्याज सहित उस पर कुल 53,000 करोड़ रुपये की देनदारी है. फिलहाल कंपनी ने 6854 करोड़ रु चुकाए हैं.