प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कोरोना वायरस के चलते उत्पन्न हो रही स्थिति और इससे निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों को लेकर देश को संबोधित किया. उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा, ‘आपसे मैंने जब भी जो भी मांगा है, देशवासियों ने निराश नहीं किया है. 130 करोड़ देशवासियों से फिर कुछ मांगने आया हूं. मुझे आपके आने वाले कुछ सप्ताह चाहिए. आपका आने वाला कुछ समय चाहिए. अभी तक विज्ञान कोरोना महामारी से बचने के लिए कोई उपाय नहीं ढूंढ़ पाया है, न ही कोई वैक्सीन बन पाई है...ऐसे में दो चीजें जरूरी है - संकल्प और संयम. इस वैश्विक महामारी को रोकने के लिए एक नागरिक के नाते हम केंद्र और राज्यों के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेंगे. आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम स्वयं संक्रमित होने से बचेंगे और दूसरों को भी संक्रमित होने से बचायेंगे.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘पिछले दो महीनों में भारत के लोगों ने इस महामारी का डटकर मुकाबला किया है. कोरोना वायरस ने पूरी मानव जाति को संकट में डाला है. प्रथम विश्व युद्ध के समय भी इतनी परेशानी नहीं हुई थी, जितनी अभी कोरोना की वजह से है.’ पीएम मोदी ने 22 मार्च को लोगों से ‘जनता कर्फ्यू’ लगाने की अपील की. उन्‍होंने देशवासियों से अपील की कि वह रविवार को सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक घर में ही रहें.

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि इस महामारी के कारण देश की अर्थव्‍यवस्‍था को नुकसान पहुंचा है. सरकार ने वित्‍त मंत्री के नेतृत्‍व में कोविड-19 इकोनॉमिक टास्‍क फोर्स के गठन का फैसला लिया है. उन्‍होंने आगे कहा, ‘देश के लोगों को आश्‍वस्‍त करता हूं कि देश में खाद्यान्‍न, दूध और अन्‍य सामान की कमी नहीं होगी, इसके लिए सरकार प्रयास कर रही है. घर पर सामान एकत्र करने का काम ना करें. पहले जैसा ही माहौल रहने दें. घबराएं नहीं.’ प्रधानमंत्री ने लोगों से भी एक दूसरे की मदद करने की भी अपील की. उन्होंने कहा कि अगर आपके यहां कोई कर्मी काम पर ना आ पाए, तो उसका वेतन ना काटें.