कोरोना वायरस से मौतों का आंकड़ा नौ हजार के पार पहुंचने के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है. व्हाइस हाउस में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका के स्वास्थ्य नियामक एफडीए ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए एक बहुत शक्तिशाली दवा को मंजूरी दी है और इसका नाम है क्लोरोक्विन. डोनाल्ड ट्रंप का यह भी कहना था कि कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज की दिशा में इस दवा के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक हैं. उनके मुताबिक आमतौर पर किसी दवा को मंजूरी देने की प्रक्रिया महीनों लंबी होती है, लेकिन एफडीए ने बहुत असाधारण तेजी दिखाते हुए यह काम तुरंत कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप का कहना था कि अब प्रशासन जल्द से जल्द यह दवा उपलब्ध करवा देगा.

क्लोरोक्विन कोई नई दवा नहीं है. मलेरिया, एमीबियेसिस (पेचिश) और अर्थराइटिस (जोड़ों के दर्द) जैसी बीमारयों में इसका इस्तेमाल खूब होता रहा है. इटली के वैज्ञानिक हांस एंडरसैग ने इसे 1934 में खोजा था. विश्व स्वास्थ्य संगठन की जो जरूरी दवाओं की सूची है उसमें क्लोरोक्विन शामिल है. इसे सबसे प्रभावी और सुरक्षित दवा माना जाता है.

अब क्लोरोक्विन के बारे में डोनाल्ड ट्रंप के बयान की बात. तथ्य यह है कि क्लोरोक्विन को एफडीए ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए कोई मंजूरी नहीं दी है. बल्कि अमेरिकी स्वास्थ्य नियामक ने इस वायरस के इलाज के लिए किसी भी दवा को मंजूर नहीं किया. संस्था ने खुद एक बयान जारी कर यह बात कही है.

वैसे इस बयान में यह भी कहा गया है कि क्लोरोक्विन को दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए मंजूरी मिली हुई है तो डॉक्टर अगर चाहें तो इसे कोरोना वायरस के मामले में इस्तेमाल करने के लिए आजाद हैं. हालांकि एफडीए का यह भी कहना था कि कोरोना वायरस के इलाज के मामले में यह दवा कितनी सुरक्षित और प्रभावी है, यह अभी साफ नहीं है. संस्था के मुखिया डॉ. स्टीफन हान के मुताबिक इसके लिए इस वायरस के मरीजों पर इसका एक बड़ा परीक्षण किया जाएगा.

एफडीए के मुताबिक उसके विशेषज्ञ सरकार और शोध संस्थाओं के साथ मिलकर इसकी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या क्लोरोक्विन को कोरोना वायरस संक्रमण के हल्के या मध्यम दर्जे के लक्षण वाले मरीजों में इस्तेमाल किया जा सकता है. संस्था के मुताबिक उसका मकसद यह जानना है कि इस दवा के जरिये संक्रमण के लक्षणों की अवधि और नतीजतन बीमारी के प्रसार को कम किया जा सकता है या नहीं. डॉ हान के मुताबिक हालात आपातस्थिति जैसे हैं, लेकिन अध्ययनों को उतना समय देना जरूरी है जितना उनमें लगता है.