भारत सहित दुनिया भर में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. देश में बीते 24 घंटों में 50 नए मामले सामने आये हैं जिसके बाद कुल मरीजों की संख्या 500 से ज्यादा हो गयी है. कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 10 पहुंच चुका है. इसी तरह दुनिया भर में बीते 24 घंटों में 2300 नए मामले सामने आये हैं और 70 लोगों की मौत हुई है.

कोरोना से मौतों और इससे संक्रमितों की संख्या में इजाफा होने की ख़बरें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छाई हुई हैं. लेकिन, इससे उबरने वालों की संख्या और इससे जुड़ी जानकारी काफी कम देखने को मिल रही है. भारत में यह आंकड़ा 39 है. ऐसे लोगों, उनके संबंधियों और आस-पड़ोस के लोगों के बीच कई तरह के सवाल आम हैं. लोग यह जानना चाहते हैं कि इससे बचने वालों की सही दर क्या है? क्या किसी व्यक्ति के कोरोना वायरस से उबरने के बाद उसके शरीर से इसका असर पूरी तरह खत्म हो जाता है, या इससे दूसरों के संक्रमित होने और भविष्य में इसके फिर से उभरने की आशंका बनी रहती है? आइये ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

अलग-अलग आंकड़ों और दावों के बीच कोरोना वायरस से सही होने की उम्मीद कितनी है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस से मरने वालों की दर 3.4 फीसदी है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे बचने वालों की दर 96.6 फीसदी ही है. जानकार कहते हैं कि जब कोरोना वायरस के फैलने की शुरुआत हुई थी, तब अधिकांश लोगों को यह पता ही नहीं चल पाया था कि वे कोरोना से संक्रमित हैं. और इस वजह से वे लोग क्रिटिकल स्टेज में पहुंच गए और उनकी मृत्यु हो गयी. आज दुनिया भर में कोरोना टेस्ट लैबों की संख्या बढ़ा दी गयी है और उसी का नतीजा है कि मरने वालों की संख्या में कमी आ रही है.

आंकड़े भी साफ़ बताते हैं कि जिन देशों में टेस्ट लैब ज्यादा हैं, वहां कोरोना संक्रमित लोगों की मृत्यु दर बेहद कम है. दक्षिण कोरिया जहां चीन के बाद सबसे पहले और सबसे ज्यादा कोरोना का असर दिखा था, उसने लैब की संख्या बढ़ाकर इसे काफी कुछ नियंत्रित कर लिया है. कोरिया में कुछ हफ़्तों से हर 10 लाख नागरिकों पर 1,100 से ज्यादा लैब काम कर रहे हैं और इसी कारण यहां पर कोविड-19 के शिकार लोगों की मृत्यु दर महज 0.6 फीसदी हो गयी है. जबकि अमेरिका में इतने ही लोगों पर केवल सात टेस्ट लैब काम कर रहे हैं, जिस वजह से वहां मृत्यु दर पांच फीसदी है. यानी जितनी जल्दी आपको कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पता लगेगा, उतनी ज्यादा आपके सही होने की उम्मीद है.

क्या सही होने के बाद भी शरीर में कोरोना वायरस का असर रहता है?

इस सवाल का कोई सटीक जवाब अभी तक नहीं मिला है. कई जानकर इसका जवाब देते हुए कहते हैं कि ‘शायद कुछ हद तक’ वायरस का असर मरीज के शरीर में ठीक होने के बाद भी रहता है और इसे पूरी तरह जाने में कुछ समय लगता है. इसे लेकर चीन के वुहान में चार डॉक्टरों ने एक अध्ययन किया है. इससे पता लगा कि कोरोना वायरस के लक्षण खत्म होने की पुष्टि होने के बाद भी अगले दो सप्ताह तक वायरस के रेशे मरीज के शरीर में बने रह सकते हैं. हालांकि, इस दौरान मरीज का छींकना और खांसना बंद हो जाता है जिस वजह से इन रेशों के किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में जाने की संभावना बेहद कम होती है. आम तौर पर चिकित्सकों का मानना है कि कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित लोगों को इससे पूरी तरह उबरने में औसतन 24 दिन का समय लगता है. लेकिन, ‘द लांसेट’ मेडिकल जर्नल में पिछले सप्ताह ही प्रकाशित हुए एक अध्ययन के मुताबिक चीन में एक मरीज की सांस नली में 37 दिनों तक सार्स सीओवी 2 (सिवियर रेसपिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस 2) जीवित रहा.

कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस से उबरने के बाद रोगी के फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है. हांगकांग में कोरोना संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने पाया है कि हर तीन में से दो ठीक होने वाले रोगियों के फेफड़ों की कार्य क्षमता 20-30 फीसदी तक कम हो गयी. हालांकि, इनका यह भी कहना है कि इस परेशानी को फिजियोथेरेपी से सही किया जा सकता है.

क्या एक बार सही होने के बाद दूसरी बार भी कोरोना वायरस हो सकता है?

किसी व्यक्ति को जब पहली बार कोई रोग होता है या वह पहली बार किसी वायरस के प्रकोप में आता है, तो उससे उबरने के दौरान उसके शरीर में उस वायरस से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है. इस प्रतिरोधक क्षमता की वजह से वह दोबारा या फिर लंबे समय तक इसकी चपेट में नहीं आ सकता. लेकिन, कोरोना वायरस के मामले में स्थिति अलग दिखाई दे रही है. बीते महीने जापान के ओसाका में एक महिला कोरोना वायरस से सही होने के कुछ रोज बाद फिर उससे संक्रमित पायी गयी. इसी तरह टोक्यो में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग और दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में एक महिला को कुछ समय बाद दूसरी बार संक्रमित पाया गया. इसके बाद चीन के ग्वांगडोंग प्रांत में शोधकर्ताओं ने पाया कि उन्होंने जितने सही मरीज देखे, उनमें से 14 फीसदी कुछ रोज बाद दोबारा कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गए.

हालांकि, इस अध्ययन में बताये गए मामलों को लेकर किसी नतीजे पर इसलिए नहीं पहुंचा जा सकता क्योंकि चीन में कई बार अस्पतालों पर गलत तरह से और जल्दबाजी में कोरोना का इलाज करने के आरोप लगे हैं. कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि चीन में मरीजों की इतनी बड़ी संख्या थी कि अस्पतालों में बेड की कमी पड़ गयी. ऐसे में कई अस्पतालों में मरीजों को पूरी तरह ठीक होने से पहले ही छुट्टी दे दी गयी. जापान और दक्षिण कोरिया में सामने आये मामलों को लेकर भी गलती होने की आशंका जताई जा रही है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि इतनी जल्दी किसी को दोबारा संक्रमण होना बहुत ही मुश्किल बात है. हांगकांग विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के निदेशक डॉ कीइजी फुकुदा एक साक्षात्कार में कहते हैं कि ऐसा उन लोगों के साथ हो सकता है जिनके शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली बेहद खराब स्थिति में हो, लेकिन ऐसे मामले भी बहुत कम ही देखने में आते हैं.

कोरोना वायरस से उबरने के बाद कब काम पर जा सकते हैं?

सीडीसी(सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ शर्तें पूरी होने पर कोरोना से पीड़ित हुआ कोई भी व्यक्ति अपने घर से बाहर निकल सकता है. ये शर्तें हैं - वायरस से उबरने के तीन दिन बाद तक उसे बुखार न आया हो, खांसी न आयी हो और सांस लेने में तकलीफ नहीं हो रही हो. साथ ही पहली बार लक्षण सामने आये हुए सात दिन बीते चुके हों. इसके अलावा कोरोना वायरस के दो दिन लगातार लिए गए टेस्ट का नतीजा नकारात्मक आया हो. शोधकर्ताओं के मुताबिक यह सब होने के बाद साफ़ हो जाता है कि संक्रमित हुआ व्यक्ति कोरोना वायरस से पूरी तरह उबर चुका है, और अब उससे किसी को कोई खतरा नहीं है.