बीते इतवार को जनता कर्फ्यू के दौरान, शाम पांच बजे सारे भारत ने उन लोगों के लिए तालियां और थालियां बजाईं जो कोरोना वायरस के इस संकट में लगातार काम कर रहे हैं. इसके ठीक आधे घंटे बाद एयर इंडिया का एक ट्वीट आया, जिसे पढ़कर यह सारी कवायद खोखली लगने लगी. इस ट्वीट में एयर इंडिया ने बताया था कि उसके स्टाफ के कई सदस्यों के साथ उनके पड़ोसी और जिन इलाकों में वे रहते हैं उनके आरडब्ल्यूए ठीक से व्यवहार नहीं कर रहे हैं. कुछ लोगों ने इन्हें अपना काम करने से रोकने की कोशिश भी की. यहां तक कि लोग उन्हें परेशान करने के लिए पुलिस तक बुला रहे हैं.

इस बुरे व्यवहार की वजह एयर इंडिया स्टाफ के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका है. एयर इंडिया ने इस ट्वीट में सरकारी महकमों से अपील की है कि वे स्टाफ की सुरक्षा का इंतजाम करें. साथ ही, उसने आम लोगों से यह गुजारिश भी की है कि वे यह याद रखें कि इसी स्टाफ की बदौलत विदेशों में फंसे उनके अपने लोग वापस घर आ पाए हैं.

हालांकि यह मामला तो घोर असंवेदशीलता का है लेकिन रूखे व्यवहार के ऐसे कई छोटे-बड़े उदाहरण हमारे आसपास हर समय दिखाई देने लगे हैं. कोरोना वायरस के इस समय में कई ऐसी बातें भी शक की नज़र से देखी जाने लगी हैं जो कुछ दिन पहले तक सम्मान की वजह बना करती थीं.

1. विदेश जाना – ‘फॉरेन रिटर्न’ भारतीय समाज में प्रतिष्ठा वाला शब्द रहा है. यहां ऐसे हर व्यक्ति को सिर्फ इसी वजह से भी सम्मान की नज़रों से देखा जाता रहा है जिसने दूसरे देशों की यात्रा की हो. इसमें भी अमेरिका या यूरोप जाने वालों को लोगों की खास तवज्जो मिलती रही है. लेकिन दुनिया भर के देशों में कोरोना के प्रकोप के बाद वहां जाने वाले लोगों को शक की नज़र से देखा जाने लगा है. अगर कोई अक्सर ही आता-जाता रहता है तो उसके बारे में यह माना जाने लगा है कि यह तो जरूर ही वायरस लेकर घूम रहा होगा. और इसके पास जाने वालों की खैर नहीं.

2. हवाई यात्रा करना – अगर कोई विदेश नहीं भी गया हो लेकिन अक्सर ही घरेलू उड़ानों का इस्तेमाल करता हो तो पहले उसे मीठे तंज मारे जाते थे कि कभी जमीन पर भी रहा करो. लेकिन आज-कल ऐसे लोग भी सम्मान से निकलकर शक के दायरे में आ गए हैं. लगभग देश के सभी हवाई अड्डों पर विदेश आने-जाने वाले लोगों की मौजूदगी होती है. इनमें से कोई भी कोरोना संक्रमित हो सकता है, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता. इसलिए यह माना जाने लगा है कि जो व्यक्ति अक्सर हवाई यात्राएं करता है, उसके और उससे कोरोना संक्रमित होने की संभावना बहुत ज्यादा है.

3. विदेशी होना – अतिथि देवो भव वाले हमारे देश में विदेशी मेहमानों को खास सम्मान दिया जाता रहा है. खास कर गोरे रंग के लोगों को. लेकिन इस समय इनके साथ लोगों का व्यवहार उल्टा हो गया है. भारत में कई जगहों पर विदेशी नागरिकों को सेवा देने और सामान बेचने से मना करने के वाकये सामने आए हैं. यह बिगड़ा हुआ व्यवहार भी विदेशी मेहमानों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका से उपजा है.

4. अमीर या प्रभावशाली हस्ती होना – धनवान लोगों या बड़ी हस्तियों के बारे में माना जाता है कि वे विदेशों की यात्रा करते ही रहते हैं या अक्सर ही विदेश आने-जाने वाले लोगों से मिलते रहते हैं. ऐसे में उनके कोरोना प्रभावित क्षेत्रों में जाने या कोरोना संक्रमित लोगों से मिलने की संभावना ज्यादा हो सकती है. इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि ये आम लोगों की तरह एयरपोर्ट और बाकी जगहों पर ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी करने से भी बचना चाहते हैं. गायिका कनिका कपूर का मामला आने के बाद से ये धारणाएं और मजबूत हुई हैं. इसके चलते लोगों ने प्रभावशाली लोगों से भी दूरी बनानी शुरू कर दी है.

5. सामाजिक तौर पर सक्रिय होना – सोशल बटरफ्लाई यानी वे लोग जो अक्सर लोगों से मिलते-जुलते रहते हैं, सामाजिक आयोजनों में जाते हैं और क्लब या घरेलू पार्टियों का हिस्सा बनते रहते हैं. अब इन सोशल बटरफ्लाइज से भी लोगों ने दूरी बनानी शुरू कर दी है. चूंकि कोरोना संक्रमण किसी ऐसी जगह पर हाथ रख देने भर से हो सकता है जिसे किसी संक्रमित व्यक्ति ने छुआ हो, इसलिए लोग कम से कम लोगों से मिलना पसंद कर रहे हैं. इसमें भी वे उन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं जो उन्हीं की तरह सीमित संपर्क वाले हों. इसके साथ ही, लोग एहतियातन न तो हाथ मिला रहे हैं और न ही गले मिल रहे हैं. हालांकि सामाजिक मेलजोल के आयोजनों में ऐसा कर पाना संभव नहीं है, इसलिए आयोजनों के साथ-साथ उनमें शिरकत करने वालों से भी दूर रहने में ही भलाई समझी जा रही है.