गूगल बता रहा है कि इस हफ्ते ऑस्ट्रेलिया में मोबाइल फोनों के बारे में जो दो जानकारियां सबसे ज्यादा खोजी गईं वे थीं - मोबाइल को संक्रमण से मुक्त यानी डिसइन्फैक्ट कैसे करें और अपने मोबाइल को साफ कैसे करें. तीसरे नंबर पर यह सवाल था कि क्या आपको घर पर आने वाली किसी चिट्ठी या सामान से भी कोरोना वायरस संक्रमण हो सकता है. वैसे इस तरह के सवालों में पहले नंबर पर यह था कि क्या कोरोना वायरस भोजन के जरिये भी फैल सकता है. उसके बाद सबसे ज्यादा लोगों ने यह पूछा था कि क्या एक बार ठीक होने पर किसी को कोरोना वायरस फिर चपेट में ले सकता है. थोड़े में कहें तो बड़ी संख्या में लोग यह जानना चाह रहे थे कि फोन, चिट्ठी या घर पर आने वाले सामान की कोरोना वायरस के फैलने में क्या भूमिका है.

जोखिम को कैसे कम किया जा सकता है, इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आपका फोन या आप तक आने वाला कोई पैकेट कोरोना वायरस की चपेट में कैसे आ सकता है. यह भी कि अलग-अलग चीजों पर कोरोना वायरस कितनी देर तक जीवित रह सकता है, इस बारे में वैज्ञानिक साक्ष्य क्या कहते हैं.

किसी फोन, चिट्ठी या लिफाफे पर कोरोना वायरस कितनी देर जिंदा रह सकता है?

इस बारे में अभी तक बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है. इसे लेकर मीडिया में कुछ आम बातें ही आई हैं कि सार्स-सीओवी-2 नाम के इस कोरोना वायरस के फैलने में अलग-अलग चीजों की क्या भूमिका है. हां, इस मुद्दे पर न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन ने हाल में एक शोध पत्र जरूर प्रकाशित किया है जिसे इस दिशा में पहला गंभीर अकादमिक काम कह सकते हैं. इसके मुताबिक सार्स-सीओवी-2 कॉपर (तांबा) और कार्डबोर्ड (गत्ता) की तुलना में प्लास्टिक और स्टेलनेस स्टील पर ज्यादा देर तक रहता है. शोधकर्ताओं का यह भी कहना था कि इन चीजों पर वायरस 72 घंटे तक जिंदा रह सकता है. शोधपत्र में यह भी कहा गया है कि कॉपर पर सार्स-सीओवी-2 चार घंटे तक ही टिक पाया. कार्डबोर्ड के लिए यह आंकड़ा 24 घंटे था.

हो सकता है कि ये आंकड़े और ज्यादा हों. वैसे भी अलग-अलग हालात के हिसाब से वायरस उस समयावधि से ज्यादा समय तक टिके रह सकते हैं जितना उनके बारे में अनुमान लगाया जाता है. ऐसा इसलिए कि इन अध्ययनों में यह देखा जाता है कि वायरस प्रयोगशालाओं में रखे एक विशेष घोल, जिसे बफर कहा जाता है, में कितनी देर तक जिंदा रहते हैं. असल जिंदगी में वायरस थूक या बलगम में रहते हैं और इसलिए किसी सतह पर उनके जिंदा रहने का समय बढ़ जाता है.

वायरस सबसे ज्यादा देर तक प्लास्टिक वाली सतह पर रहते हैं. यह चिंता की बात है और इसका मतलब यह भी है कि फोन पर कोई वायरस कई दिनों तक मौजूद रह सकता है.

फोन पर वायरस कैसे आ सकता है?

जब आप अपने फोन पर बात करते हैं तो आपके मुंह से थूक की लगभग अदृश्य सूक्ष्म बूंदें भी बाहर आती हैं. कोविड-19 की चपेट में आये किसी भी शख्स के गले में जो बलगम होता है उसमें वायरसों की बड़ी संख्या हो सकती है. सो इसकी काफी संभावना है कि जब भी वह बात करे, उसके फोन पर वायरसों की बौछार हो रही हो.

अब अगर यह व्यक्ति अपना फोन किसी और को पकड़ाए, तो वायरस उस दूसरे शख्स की उंगलियों से होते हुए उसके मुंह, नाक और आंखों के जरिये उसके शरीर के भीतर जा सकता है. (यहां याद रखें कि हर संक्रमित व्यक्ति में शुरुआत में ही बुखार और कफ जैसे लक्षण दिखना जरूरी नहीं है).

यह भी संभव है कि अगर कोई संक्रमित व्यक्ति शौच के बाद अपने हाथ ठीक से न धोए और दूसरी चीजों को छूता रहे तो औरों को भी संक्रमण हो जाए. कोरोना वायरस अक्सर इंसानों के मल में भी पाया गया है. यही वजह है कि बार-बार अच्छी तरह से हाथ धोना बहुत महत्वपूर्ण है.

क्या घर पर आने वाली किसी चिट्ठी या पैकेट से भी कोरोना वायरस फैल सकता है?

यह संभव है कि आपके घर आने वाली किसी चिट्ठी या पैकेट में वायरस हो. आखिर ये चीजें भी कोई न कोई इंसान ही लेकर आता है. हो सकता है कि वह संक्रमित हो और उसके हाथ से वायरस लिफाफे या पैकेट में आ जाए. हालांकि मुझे लगता है कि इससे आप तक संक्रमण पहुंचने का जोखिम बहुत ही कम है. न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपे एक अध्ययन के मुताबिक गत्ते पर पर कोरोना वायरस एक दिन से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकता. और प्लास्टिक के उलट गत्ते की सतह पर सूक्ष्म छिद्र होते हैं. यानी अगर इस पर पड़ी थूक की बूंद भीतर घुस सकती है तो अगर कोई गत्ते से बना पैकेट पकड़े तो उसके हाथ में वायरस का जाना इतना आसान नहीं होगा.

मैं अपना जोखिम कम करने के लिए क्या कर सकता हूं?

पहली बात, बार-बार हाथ धोते रहें. दूसरों के साथ संपर्क कम से कम रखें. घर से बाहर निकलना ही पड़े तो कम से कम डेढ़ मीटर की दूरी पर रहें. खासकर तब तो यह और जरूरी है जब आप किसी के साथ बात कर रहे हों. अपना फोन अपने पास ही रखें. किसी भी हालत में दूसरे को न दें, खासकर उसे जिसकी तबीयत ठीक न लग रही हो.

अभी यह साफ नहीं है कि बच्चे कोरोना वायरस के संक्रमण में क्या भूमिका निभाते हैं. फिर भी यह जरूरी है कि वे अपने माता-पिता का फोन छूने से पहले और उसके बाद भी अपने हाथ अच्छे से धोएं. वैसे अभी यही संभावना ज्यादा दिखती है कि कोरोना वायरस का संक्रमण बड़ों से बच्चों को हो सकता है.

आदर्श स्थिति तो यह है कि आप अपना फोन, टैबलेट और कीबोर्ड एल्कोहल वाइप्स (इनमें भी 70 फीसदी एल्कोहल होना चाहिए) से साफ करें. ये वायरस को खत्म करने में काफी असरदार हैं. हालांकि बढ़ी हुई मांग के चलते इनका मिलना अब मुश्किल होगा. ज्यादातर बेबी वाइप्स में एल्कोहल बहुत कम होता है इसलिए ये उतने असरदार नहीं होते. हालांकि ये वायरस वाले कणों को सबंधित सतह से हटा तो सकते ही हैं. अगर आपके पास कुछ भी नहीं है तो साबुन वाले पानी में डुबोकर निचोड़ा हुआ एक कपड़ा लें और इससे फोन साफ करें. ऐसा करते हुए ध्यान रखें कि कपड़ा अच्छी तरह निचुड़ा हुआ हो नहीं तो पानी भीतर जाने से आपका फोन खराब हो सकता है.

चिट्ठियां और पैकेज डिलिवरीज लेते हुए कोशिश करें कि आप इन्हें लाने वाले शख्स से दूर खड़े हों. हालांकि कई कंपनियां और उनके प्रतिनिधि अब खुद ही इस बात का ख्याल रख रहे हैं कि उनका ग्राहक से सीधा संपर्क न हो. उदाहरण के लिए कइयों ने टैबलेट पर ग्राहकों के सिगनेचर लेना छोड़ दिया है. आप किसी पैकेट को छूने से पहले उसे अच्छी तरह पोंछ भी सकते हैं. पैकेजिंग को हटाकर किसी सुरक्षित जगह रखने के बाद अपने हाथ भी अच्छी तरह से धो लें.

आखिर में बात यह है कि जोखिम कभी भी जीरो नहीं हो सकता और अगर आप हर चीज को छूने से डरने लगेंगे तो दुनिया एक दुस्वप्न हो जाएगी.


(यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी में एसोसिएट प्रोफेसर और मेडिसिन में प्रिंसिपल रिसर्च फेलो यूवन टोवी का यह लेख मूल रूप से द कनवर्जेशन पर प्रकाशित हुआ है.)