करीब आठ महीने बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला रिहा हो गए हैं. उन पर लगा जन सुरक्षा कानून (पीएसए) हटा दिया गया है. उमर अब्दुल्ला पांच अगस्त 2019 से हिरासत में थे. उसी महीने केंद्र ने जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था.

इससे पहले 13 मार्च को उमर अब्दुल्ला के पिता फारुख अब्दुल्ला को भी रिहा कर दिया गया था. उन पर भी पीएसए लगा था. 83 साल के फारुक अब्दुल्ला भी पिछले साल पांच अगस्त से हिरासत में थे. पीडीपी मुखिया और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अब भी पीएसए के तहत हिरासत में हैं.

पीएसए उन लोगों पर लगाया जा सकता है जिन्हें सुरक्षा और शांति के लिए खतरा माना जाता हो. यह पहली बार था जब कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों पर लगने वाला पीएसए मुख्यधारा के नेताओं पर लगा. 1978 में जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला ने इस कानून को लागू किया था. 2010 में इसमें संशोधन किया गया था जिसके तहत बगैर ट्रायल के ही कम से कम छह महीने तक किसी को भी हिरासत में रखा जा सकता है. राज्य सरकार चाहे तो इस अवधि को बढ़ाकर दो साल तक भी किया जा सकता है.