कोरोना वायरस से होने वाली चर्चाओं में अक्सर आपको बताया जाता है कि इससे संक्रमित होने वालों में फ्लू के लक्षण होते हैं. लेकिन फरवरी-मार्च का महीना ऐसा है जब मौसम बदलने के कारण अक्सर लोगों को सर्दी-जुकाम जकड़ ही लेता है. इसलिए सिर्फ फ्लू होने का मतलब कोरोना से संक्रमित होना नहीं है. इसके साथ अगर बुखार, बदन दर्द, दस्त जैसे कुछ और लक्षणों को रखकर देखेंगे तो कुछ अंदाजा लगाया जा सकता है. अगर इसमें कुछ और चीजें, जैसे किसी व्यक्ति की उम्र, उसकी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं, सामाजिक गतिविधियों और उसके द्वारा हाल ही में की गईं यात्राओं की जानकारियां भी जोड़ दें, तो काफी हद तक यह बताया जा सकता है कि उसे कोविड-19 होने की कितनी संभावना है.

एक आम आदमी के लिए इतना सब सोच और जोड़ पाना आसान नहीं है. इसलिए एकाध लक्षण होने पर भी हममें से कई लोग कोरोना के डर से अस्पताल का रुख कर सकते हैं. इस स्थिति से बचने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कुछ प्रतिष्ठित संस्थाओं ने ऑनलाइन डाइग्नोस्टिक टूल्स विकसित किये हैं. इस तरह के सबसे अच्छे टूल्स में से दो हैं अपोलो हॉस्पिटल का कोरोना वायरस रिस्क स्कैन और ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले पोर्टल प्रैक्टो का कोरोना सिम्पटम चैकर. इन दोनों में से किसी भी टूल पर जाइये. कुछ आसान से सवालों के जवाब दीजिये और जान जाइये कि आपके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की कितनी संभावना है. इनके द्वारा किये गये आपके डाइग्नोसिस उतने ही सही होंगे जितने ईमानदार जवाब आप इन टूल्स को देंगे.