देश में पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लग चुका है. इसका मतलब यह है कि कोरोना वायरस से निपटने के मामले में अब सारे राज्य केंद्र के निर्देशों पर काम करेंगे. साधारण परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था की तरह स्वास्थ्य भी राज्यों का विषय होता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है. एक आदेश में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोरोना वायरस को देश के लिए खतरा बताया है जिससे निपटने की कमान नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को दे दी गई है. इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं.

इस मुद्दे पर केंद्रीय कैबिनेट सचिव और मुख्य सचिव ने राज्यों के वरिष्ठ नौकरशाहों और पुलिस प्रमुखों के साथ एक बैठक की. इसमें राज्यों को बताया गया कि उन्हें केंद्र के निर्देशों का पालन करना होगा. सूत्रों के मुताबिक जब राज्यों की तरफ से पूछा गया कि क्या यह स्थिति कर्फ्यू जैसी है तो उन्हें बताया गया कि यह कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, लेकिन कोरोना वायरस से उपजी महामारी को फैलने से रोकने के लिए उन्हें यह सुनिश्चित करना है कि लोग अपने घरों के भीतर रहें.

कल रात ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस से उपजे हालात के चलते देश में 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को बड़े नुकसान से बचाने के लिए यह असाधारण कदम जरूरी है. अगले 21 दिनों के दौरान सिर्फ जरूरी सेवाएं जारी रहेंगी. भारत में कोरोना वायरस से मौतों का आंकड़ा 11 तक पहुंच गया है जबकि दुनिया के लिए यह 19 हजार हो गया है.