चीन सरकार का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने खबर दी है कि युन्नान प्रांत में एक व्यक्ति की हंता वायरस से मौत हो गई है. चीन से ही निकले कोरोना वायरस से सहमी दुनिया को इस खबर ने और भी डरा दिया है. सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है.


हंता वायरस क्या है?

हंता वायरस कोई नया वायरस नहीं है. इसका पहला मामला 1993 में सामने आया था. अमेरिकी संस्था सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) के मुताबिक यह वायरस इंसानों में चूहों के जरिये फैलता है. हंता वायरस के ज्यादातर मामले ग्रामीण इलाकों में होते हैं जहां जंगलों और खेतों में इसके वाहक यानी कैरियर चूहे खूब पनपते हैं. किसी तरह उनके मल-मूत्र या लार के संपर्क में आने वाले इंसान संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं.

चूहों की अलग-अलग किस्मों में अलग-अलग तरह के हंता वायरस मिलते हैं. उदाहरण के लिए अमेरिका और कनाडा में डियर माउस नाम की चूहों की एक प्रजाति पाई जाती है. ये चूहे सिन नॉमर नाम के एक हंता वायरस के वाहक होते हैं.

अभी यह साफ नहीं है कि हंता वायरस इंसानों से इंसानों में फैलता है या नहीं. अमेरिका में इस तरह के कोई मामले देखने में नहीं आए हैं. हालांकि चिली और अर्जेंटीना में ऐसे इक्के-दुक्के मामले दर्ज किए गए हैं. यहां हंता वायरस की एक अलग किस्म मिलती है जिसे एंडीज वायरस कहा जाता है.

हंता वायरस संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

हंता वायरस से संक्रमित व्यक्ति को बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, सर्दी लगने और पेट संबंधी दिक्कतों की शिकायत हो सकती है. ऐसा होने में एक से आठ हफ्ते लग सकते हैं. संक्रमित व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर उसके फेफड़ों में पानी भर जाता है.

बीते साल जनवरी में अर्जेंटीना और चिली से लगती एंडीज पर्वतमाला के पेटागोनिया इलाके में हंता वायरस से संक्रमित नौ लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद पर्यटकों को वहां न जाने को कहा गया था. सीडीसी के मुताबिक हंता वायरस में मृत्यु दर 38 फ़ीसदी होती है और इस बीमारी का अलग से कोई इलाज नहीं है.