1-ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा का दामन थामने और उनके समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफ़ा देने के बाद मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार आख़िर में गिर ही गयी. अब शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर से मुख्यमंत्री हैं. कांग्रेस नेता कमलनाथ ने इस्तीफ़ा देते समय इशारा किया कि आने वाले उपचुनाव में उनको अपनी सरकार की वापसी की काफ़ी उम्मीदें हैं. कांग्रेस के कई नेता भी ये कह रहे हैं कि भाजपा की सरकार स्थायी नहीं होगी. लेकिन इस बात की बहुत कम सम्भावना है. द प्रिंट हिंदी पर अरविंद कुमार का लेख.

कमलनाथ ने मध्य प्रदेश में एक भी ऐसा काम नहीं किया कि उनकी सरकार के गिरने का लोग दुख मनाएं

2-कोलकाता में कोरोना वायरस के मरीज़ों की बढ़ती तादाद और इससे एक व्यक्ति की मौत होने के बाद ‘मिनी चाइना’ कहे जाने वाले कोलकाता के ‘चाइना टाउन’ इलाके में रहने वाले चीनियों का जीना दूभर हो गया है. इनमें से ज़्यादातर लोग ऐसे हैं जो कभी चीन नहीं गए . इसके बावजूद इन लोगों को राह चलते स्थानीय लोगों की कटु टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है. बीबीबी हिंदी पर प्रभाकर मणि तिवारी की रिपोर्ट.

कोरोना: ‘मैं वायरस नहीं हूं, मैं कोलकाता में जन्मा हूं’

3-कोरोना वायरस के फैलते संकट के बीच बीते दिनों डाक्टरों सहित सभी स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति कृतज्ञता जताने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आह्वान काफी चर्चा में रहा. लेकन दूसरी तरफ से देखें तो कृतज्ञता के साथ जब अपनी लाचारी का एहसास जुड़ जाए तो मनुष्य उससे मुक्त होना चाहता है. एक समुदाय ही रहम, कृपा, राहत का पात्र बनता रहे यह वह कबूल नहीं कर सकता. वह बराबरी हासिल करना चाहता है. द वायर हिंदी पर अपूर्वानंद का लेख.

कृतज्ञता का भाव ग़ैर-बराबरी और नाइंसाफी की स्थिति से जुड़ा हो, तो हिंसा पैदा होती है

4-कोरोना वायरस ने स्वास्थ्य तंत्र और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर दी है. इसके इतर डाउन टू अर्थ हिंदी पर शगुन कपिल की यह रिपोर्ट बताती है कि इस वायरस के कारण अब दुनियाभर में खाद्य पदार्थों की मारामारी शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में यह संकट और विकराल हो सकता है.

कोरोना के कारण दुनियाभर में भोजन के लिए मच रहा कोहराम

5-कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर में 26 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. हममें से जो लोग कोरोना वायरस से हर दिन संक्रमण और मौत की दर पर नजर रख रहे होंगे उन्होंने देखा होगा कि हर देश में मौत की दर अलग है. ऐसा क्यों है, डॉयचे वेले की यह रिपोर्ट इसके पीछे छिपे कारणों को समझने की कोशिश करती है.

कोरोना के कारण मौत की दर सब देशों में अलग क्यों