भारत मे कोरोना वायरस के फैलने से पैदा होने वाली स्थितियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले पीएम सिटिजन असिस्टेंस ऐंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशंस (आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष) यानी पीएम केयर्स फंड की घोषणा की. प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों और काॅरपोरेट घरानों से इस फंड में दान करने की अपील की और कहा कि इसमें जो पैसा आएगा, उससे कोरोना वायरस के खिलाफ चल रहे युद्ध को मजबूती मिलेगी.

इस फंड की शुरुआत के वक्त सरकार की ओर से जो बयान जारी किया गया, उसमें कहा गया, ‘कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चिंताजनक हालात जैसी किसी भी प्रकार की आपात स्थिति या संकट से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य से एक विशेष राष्ट्रीय कोष बनाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और इससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए पीएम केयर्स फंड के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है. प्रधानमंत्री इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और इसके सदस्यों में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं वित्त मंत्री शामिल हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह हमेशा माना है और इसके साथ ही अपने विभिन्न मिशनों में यह बात रेखांकित की है कि किसी भी मुसीबत को कम करने के लिए सार्वजनिक भागीदारी सबसे प्रभावकारी तरीका है और यह इसका एक और अनूठा उदाहरण है. इस कोष में छोटी-छोटी धनराशियां दान के रूप में दी जा सकेंगी. इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग इसमें छोटी-छोटी धनराशियों का योगदान करने में सक्षम होंगे.’

पीएम केयर्स फंड का बैंक अकाउंट भारतीय स्टेट बैंक की नई दिल्ली स्थित मुख्य शाखा में है जिसमें लोग सीधे पैसे जमा करा सकते हैं. यह जानकारी भी दी गई है कि इस कोष में दी जाने वाली दान राशि पर धारा 80 (जी) के तहत आयकर से छूट दी जाएगी. बाद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कॉरपोरेट मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न इसमें दी जाने वाली राशि को कंपनियों की सीएसआर के मद में शामिल किया जाएगा.

इन जानकारियों के अलवा पीएम केयर्स धर्मार्थ ट्रस्ट के बारे में कोई और जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. भारत में ट्रस्ट, इंडियन ट्रस्ट एक्ट, 1882 के तहत काम करते हैं. किसी भी धर्मार्थ ट्रस्ट के लिए यह जरूरी होता है कि उसकी एक ट्रस्ट डीड बने जिसमें इस बात का स्पष्ट जिक्र होता है कि वह किन उद्देश्यों के लिए बना है, उसकी संरचना क्या होगी और वह कौन-कौन से काम किस ढंग से करेगा. फिर इसका रजिस्ट्रेशन सब रजिस्ट्रार के यहां कराना होता है. पीएम केयर्स फंड की ट्रस्ट डीड, बायलॉज और इसका रजिस्ट्रेशन कब हुआ, ये जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई है. लेकिन इस ट्रस्ट में दान की बरसात होने लगी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इसकी पहल होने की वजह से बड़े काॅरपोरेट घराने इस कोष में करोड़ों रुपये का दान दे रहे हैं. ऐसे लोगों में फिल्म अभिनेता, सरकारी कर्मचारी और सुरक्षा बल भी शामिल हैं. विभिन्न नेता-मंत्री भी इसमें निजी या अपने एमपीलैड फंड से सहयोग दे रहे हैं. आम लोग भी अपनी सामर्थ्य के हिसाब से इस ट्रस्ट को समृद्ध कर रहे हैं. दान देने वालों का प्रधानमंत्री की ओर से आभार व्यक्त किया जा रहा है ताकि और अधिक से अधिक लोग दान देने को प्रेरित हों.

लेकिन इस फंड को बनाने और इससे संबंधित कई बातों पर कई तरह के सवाल भी उठाए जा रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही उठाया जा रहा है कि इस नए फंड की आवश्यकता क्या थी? क्योंकि इसी तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) पहले से काम कर रहा है. पाकिस्तान से विस्थापित लोगों की मदद करने के लिए जनवरी, 1948 में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहल पर इसकी स्थापना की गई थी. उसके बाद से हर आपदा की स्थिति में और सामान्य समय में भी आम लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इससे मदद की जाती है. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष भी एक ट्रस्ट के तौर पर काम करता है और इस ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं. वे संबंधित अधिकारियों की मदद से इस ट्रस्ट का प्रबंधन करते हैं. नए ट्रस्ट में कौन से अधिकारी होंगे, इसके बारे में जानकारी नहीं है.

पीएम केयर्स फंड ट्रस्ट के बारे में अब तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि इसमें प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री अपने पद पर होने के नाते शामिल हैं या अपनी व्यक्तिगत क्षमताओं में. हालांकि, नाम पीएम केयर्स है, इसलिए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कम से कम प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष हैं. बाकी लोगों के बारे में अभी पक्के तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता.

कांग्रेस नेता सलमान अनीस सोज नए ट्रस्ट के गठन पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में 16 दिसंबर, 2019 तक 3,800 करोड़ रुपये पड़े हुए थे. कोविड-19 से संबंधित दान इस कोष में क्यों नहीं डाला जा सकता था? क्यों पीएम केयर फंड बनाया गया? इस ट्रस्ट में प्रधानमंत्री और तीन मंत्री हैं, इसमें विपक्ष से और सिविल सोसाइटी से किसी को क्यों नहीं शामिल किया गया?’

लोग नए ट्रस्ट के गठन पर इसलिए भी सवाल उठा रहे हैं क्योंकि इसके तहत तब काम शुरू हो पाएगा जब इसकी सारी व्यवस्था बनेगी. लेकिन प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के कामकाज की एक व्यवस्था बनी हुई थी और उसमें पर्याप्त धन पहले से ही था, इसलिए इसके जरिए काम करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता था.

लेकिन पीएम केयर्स फंड के पक्ष में यह कहा जा सकता है कि पीएमएनआरएफ के तहत ‘किसी व्यक्ति और संस्था से केवल स्वैच्छिक अंशदान ही स्वीकार किए जाते हैं. सरकार के बजट स्रोतों से अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बैलेंस शीट्स से मिलने वाले अंशदान स्वीकार नहीं किए जाते हैं.’ लेकिन ऐसा तो अभी एमपी केयर्स के मामले में भी नहीं हो रहा है. उसमें भी सरकारी बजट का पैसा नहीं आने वाला है और अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक इसमें सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी ही योगदान दे रहे हैं, उनकी कंपनिया नहीं. लेकिन अगर यह प्रावधान पीएम केयर्स फंड के मामले में है तो इसे बेहद आसानी से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के मामले में भी किया जा सकता था.

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में आने वाले धन और उसके द्वारा किये जाने वाले खर्च का विवरण | pmnrf.gov.in/hi

पीएम केयर्स फंड के पक्ष में एक बात और कही जा सकती है. प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में सांसदों के एमपीलैड फंड से पैसा नहीं दिया जा सकता है. और अगर एमपीलैड फंड का पैसा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में डाले जाने की व्यवस्था बना दी जाती तो इसे किसी भी आपदा में राहत पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था जोकि सही नहीं होता. जबकि पीएम केयर्स के मामले में यह पैसा केवल कोरोना वायरस जैसी विकराल समस्या से लड़ने के लिए ही इस्तेमाल किया जाएगा. लेकिन स्थिति पूरी तरह से पीएम केयर्स के मामले में भी साफ नहीं है.

पीएम केयर्स के बारे में सरकार ने यह कहा है कि ‘कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चिंताजनक हालात जैसी किसी भी प्रकार की आपात स्थिति या संकट से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य से एक विशेष राष्ट्रीय कोष बनाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और इससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए ‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)’ के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है.’ यानी कि इसे भी कोविड-19 जैसी किसी भी आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर ऐसा है तो अब एमपीलैड फंड को भी ऐसी किसी भी आपदा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

2019 में पुलवामा हमले के बाद शहीद हुए जवानों के परिजनों को मदद पहुंचाने के लिए फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने ‘भारत के वीर’ नाम से एक ट्रस्ट बनाने की घोषणा की थी. इसके जरिए उन्होंने ऐसी परिस्थितियों का सामना करने वाले सुरक्षा बलों के जवानों के परिजनों के मदद करने की बात कही थी. अक्षय कुमार ने नए ट्रस्ट पीएम केयर्स में भी 25 करोड़ रुपये दान देने की घोषणा की है. भारत के वीर ट्रस्ट को बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ले लिया. इस ट्रस्ट में भी काफी लोगों ने दान दिए थे. इस पैसे को किस तरह से खर्च किए गया, इसे लेकर पारदर्शिता के साथ कोई जानकारी ट्रस्ट की वेबसाइट पर नहीं मिलती है. इस तरह की अपारदर्शिता की आशंकाएं पीएम केयर फंड को लेकर भी व्यक्त की जा रही हैं.

पीएम केयर्स को लेकर कुछ लोगों के मन में कुछ सवाल और भी हैं. कहा जा रहा है कि जब नया फंड आम लोगों के दान से बन रहा है तो इसका नाम प्रधानमंत्री के नाम पर क्यों हो. हालांकि यह आरोप तो पीएमएनआरएफ पर भी लगाया जा सकता है. इसके अलावा पीएम केयर्स फंड की अभी अपनी कोई वेबसाइट भी नहीं है. साथ ही यह भी नहीं पता है कि इस ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन किस पते पर कराया गया है.

पीएम केयर्स फंड से संबंधित सवालों को लेकर कुछ लोगों ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारियों के लिए आवेदन भी डाले हैं. लेकिन सही यही होगा कि सरकार खुद ही इस मामले में सारी जानकारियां सार्वजनिक करे और यह भी साफ-साफ बता दे कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के होते हुए नए ट्रस्ट के गठन की क्या आवश्यकता थी.