कोरोना वायरस संकट के बीच वाट्सएप पर वायरल हो रहे एक मैसेज में कहा जा रहा है कि मुंबई पुलिस ने 52 वाट्सएप ग्रुप के एडमिन्स को गिरफ्तार कर लिया है. कहा जा रहा है कि यह कार्रवाई कोरोना वायरस को लेकर गलत जानकारियां फैलाने के लिए हुई है. यह मैसेज कुछ यूं है, ‘52 ग्रुप एडमिन्स इस समय दादर के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में हैं. उन्होंने अपने ग्रुप में कुछ भ्रामक मैसेज फॉरवर्ड किए थे. हर एडमिन के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है.’ आगे कहा गया है कि इन सभी को जमानत मिल जाएगी लेकिन इन्हें एक से पांच साल तक अदालतों के चक्कर काटने होंगे.

लेकिन मुंबई पुलिस ने वाट्सएप एडमिन्स के खिलाफ ऐसी किसी कार्रवाई से इनकार किया है. उसके प्रवक्ता और डीसीपी प्रणय अशोक ने इस तरह के मैसेज को गलत बताया है. दादर पुलिस स्टेशन ने भी कहा है कि यह मैसेज फर्जी है.

इस मैसेज के दूसरे हिस्से में यह चेतावनी भी दी गई है कि केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस से जुड़ी कोई भी पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर करने को अपराध बना दिया है जिसके लिए सजा होगी. यह जानकारी गृह मंत्रालय में प्रधान सचिव बताए जा रहे रवि नायक के हवाले से दी गई है. इसमें यह भी कहा गया है कि कोरोना वायरस से जुड़ी कोई भी जानकारी अब कोई सरकारी एजेंसी ही पोस्ट कर सकती है और अगर किसी वाट्सएप ग्रुप ने ऐसा किया तो उस ग्रुप के सारे सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई होगी.

क्या वास्तव में केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस से जुड़ी किसी भी जानकारी के शेयर किए जाने को अपराध बना दिया है. गृह मंत्राल की वेबसाइट बताती है कि वहां रवि नायक नाम का कोई अधिकारी नहीं है. न ही इसमें प्रधान सचिव जैसे किसी पद का जिक्र है. यानी यह जानकारी भी फर्जी है.