हिंदी के एक चर्चित लेखक ने पिछले दिनों फेसबुक पर एक मजाकिया टिप्पणी करते हुए लिखा कि ‘लॉकडाउन चल रहा है और मेडिकल स्टोर में कॉन्डम खत्म हो गए हैं. लेकिन मुझे क्या, मैं तो अकेला रहता हूं.’ मस्ती-मजाक में कही गयी यह बात गलत नहीं है. आजकल बाज़ार में कॉन्डम की कमी चर्चा में है और यह सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में देखने को मिल रही है. बाकी दूसरी समस्याओं की तरह इस समस्या की वजह भी कोरोना संकट ही है. बाज़ार की मानें तो महामारी फैलने के बाद से, बीते लगभग दो महीनों में दुनिया भर में कॉन्डम की मांग में बढ़त का आंकड़ा दो अंको में पहुंच गया है. लोग घर पर हैं और अपने आपको व्यस्त और स्वस्थ रखने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रहे हैं. इसके उलट कॉन्डम्स की सप्लाई 50 फीसदी तक कम यानी आधी हो गई है.

कॉन्डम की सप्लाई में कमी की सबसे बड़ी वजह दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्डम निर्माता कंपनी कैरेक्स बरहैड (Karex Berhad) द्वारा अपना उत्पादन रोक दिया जाना है. मलेशिया स्थित इस कंपनी ने देश में लॉकडाउन घोषित होने के बाद बीते महीने अपनी फैक्ट्रियां अनिश्चित समय के लिए बंद कर दी थीं. दरअसल, विश्व भर में बनाए जाने वाले कॉन्डम्स का 20 फीसदी अकेले कैरेक्स बनाती है. यानी कि दुनिया भर में खरीदे जाने वाले हर पांच कॉन्डम्स में से एक कैरेक्स का होता है. आंकड़ों में थोड़ी और बात की जाए तो यह कंपनी हर साल लगभग 500 करोड़ कॉन्डम्स बनाती है जो दुनिया के 140 देशों में सप्लाई किए जाते हैं. ड्यूरेक्स समेत तमाम बड़े ब्रांड्स और कई राष्ट्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए भी कॉन्डम प्रोडक्शन का काम यही फर्म करती है.

लेकिन कैरेक्स की फैक्ट्रियां बंद होना ही इस कमी की एकमात्र वजह नहीं है. दरअसल, मलेशिया के अलावा भी कॉन्डम के सबसे बड़े निर्यातक देश एशियाई हैं. इनमें सबसे आगे चीन और उसके बाद भारत और थाईलैंड का नाम आता है. चीन से ही इस महामारी की शुरूआत हुई थी जिसके कारण वहां पर हर तरह का उत्पादन कार्य रोक दिया गया. इनमें कॉन्डम भी शामिल थे. इसी तरह, भारत और थाइलैंड में कई हफ्तों का लॉकडाउन घोषित होने के चलते कॉन्डम की फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं. इन हालात में बाज़ार में कॉन्डम की कमी न होती तो आश्चर्य की बात होती.

अब सवाल उठता है कि यह स्थिति कब तक ऐसी ही रहने वाली है? कॉन्डम व्यापार से जुड़ी ताजा खबर यह है कि बीती 28 मार्च से कैरेक्स का उत्पादन लगभग एक हफ्ते बंद रहने के बाद फिर शुरू हो गया है. चीन में कोरोना संक्रमण अब नियंत्रण में आ गया है और उस सहित दूसरे देश भी ऐसा ही करने के प्रयास कर रहे हैं. लेकिन मलेशिया महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक है. इसलिए बाज़ार के जानकार यह आशंका भी जताते है कि कैरेक्स का प्रोडक्शन कभी-भी दोबारा बंद हो सकता है. इसके साथ ही, प्रोडक्शन का काम अभी आंशिक तौर पर ही शुरू हुआ है, इसलिए यह कह पाना मुश्किल है कि इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्डम की बढ़ी हुई मांग को कितना पूरा किया जा सकता है. कुल मिलाकर, स्थिति को सामान्य होने में अभी काफी समय लग सकता है.

लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं होती. आने वाले समय में कॉन्डम की कीमतें बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है. पिछले दिनों कैरेक्स के प्रमुख गो मियाह केट ने एक अंतर्राष्ट्रीय समाचार वेबसाइट से बात करते हुए कहा था कि ‘प्रोडक्शन बंद रहने के दौरान भी उन्होंने अपने कर्मचारियों को वेतन दिया है. साथ ही, अब जब आधा काम ही शुरू हो पाया है, तब भी उनके वेतन में कटौती नहीं की जा रही है. इसलिए भविष्य में कॉन्डम थोड़े और महंगे हो सकते हैं.’

दुनिया की दूसरी कॉन्डम निर्माता कंपनियों का भी यही हाल है. लेकिन मुश्किल एक और यह भी है कि आने वाले समय में पूरी दुनिया में लोग गंभीर आर्थिक संकट से गुजर सकते हैं. ऐसे में बड़े ब्रांड्स के और भी महंगे कॉन्डम खरीदना उनके बस से बाहर की चीज हो सकता है. ऐसे में कॉन्डम्स न होने और फिर महंगे होने का असर दुनिया की जनसंख्या पर कितना होगा यह देखने वाली बात होगी. यह इसलिए जटिल है क्योंकि अभी इस बात का सही-सही अंदाजा नहीं है कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की वजह से कितनी मौतें हो सकती हैं. एक अनुमान के मुताबिक अकेले अमेरिका में ही कोरोना वायरस की वजह से दो लाख से 17 लाख लोग अपनी जान से हाथ धो सकते हैं.

मुश्किल आर्थिक हालात में कॉन्डम की कमी का असर आने वाले समय में कुछ परिवारों की आर्थिक स्थिति को और खराब कर सकता है. ऐसे कुछ परिवार न चाहते हुए भी बड़े हो सकते हैं. या फिर उन्हें अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए अच्छी-खासी रकम खर्च करनी पड़ सकती है. यानी कि कोरोना वायरस की वजह से कॉन्डम की सप्लाई कम होने का असर कैसा और कितना हो सकता है यह चलते-फिरते सोच पाना संभव नहीं है.