1-भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह से कोरोना वायरस से पीड़ित रोगियों के इलाज पर ध्यान केंद्रित किए हुए है. लेकिन लॉकडाउन में डायबिटीज़ जैसी दूसरी बीमारियों के मरीज़ों को देश के अधिकतर लैब और क्लीनिक बंद होने के कारण काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. डॉक्टरों को डर है कि आने वाले दिनों में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की तुलना में इन बीमारियों मरीज़ों की मौत ज़्यादा हो सकती है. बीबीसी पर जुबैर अहमद की रिपोर्ट

कोरोना लॉकडाउन: भारत में ग़ैर-कोरोना मरीज़ों की जाएंगी अधिक जानें?

2-कोरोना से लड़ाई में भारत ने अपने सारे संसाधन झोंक दिए हैं. होटलों को हॉस्पिटल बनाया जा रहा है. रेल के डिब्बों को आइसोलेशन वार्डों में तब्दील किया जा रहा है. लेकिन कोरोना से लड़ने के लिए युद्ध स्तर की तैयारियों की बीच भारत का एक ताक़तवर संसाधन अभी भी अपनी जिम्मेदारियों से भागकर प्रोपेगैंडा फैलाने में लगा हुआ है. वह है दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी, भााजपा का आईटी सेल. द प्रिंट हिंदी पर ज्योति यादव की टिप्पणी.

भाजपा आईटी सेल ने कोरोना महामारी को चुनाव समझ लिया है, जिसमें वो झूठ के दम पर सफलता पाना चाहते हैं

3-मध्य प्रदेश में भाजपा की सत्ता वापसी तो हो गई है, लेकिन शिवराज सिंह चौहान के लिए यह कार्यकाल उनके पिछले कार्यकालों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहेगा. विश्लेषकों के अनुसार, उन्हें पार्टी में आए बाग़ी विधायकों को साधने से लेकर उन मुद्दों से भी निपटना है, जिन पर वे कांग्रेस को घेरते आए हैं. द वायर हिंदी पर दीपक गोस्वामी की रिपोर्ट.

मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह चौहान के लिए वापसी के बाद की राह आसान नहीं है

4-कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में जहां एक ओर लोग घरों में खुद को महफूज किए हुए हैं वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो असहाय लोगों की सेवा में दिन-रात अथक मेहनत कर रहे हैं. वह भी तब, जब उन्हें इस महामारी का मुकाबला करने के लिए कोई सुरक्षा और विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला है. डाउन टू अर्थ हिंदी पर विवेक मिश्रा की रिपोर्ट.

कोरोना संक्रमण के खिलाफ संघर्ष करते गुमनाम सिपाही

5-गुरुवार को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेट्री लव अग्रवाल ने अपनी रोजाना प्रेस ब्रीफिंग में यह हैरान करने वाली जानकारी दी कि बीते तीन दिनों में कोरोना से जुड़े मामले दोगुने हो गए हैं. इसके आगे उन्होंने एक और चिंताजनक बात कही कि कुल मामलों में से 647 मामले तबलीगी जमात के जलसे में शामिल लोग हैं. यानि कुल पीड़ितों में 25 फीसदी बीमार तब्लीगी जमात के सदस्य हैं. इस प्रकरण ने भारतीय मीडिया के एक हिस्से का बेशर्म चेहरा भी सामने रख दिया है. न्यूजलॉन्ड्री हिंदी पर मोहम्मद ताहिर शब्बीर का लेख.

क्यों तब्लीगी जमात ने देश और मुसलमानों को कोरोना से लड़ाई में हार की ओर धकेल दिया है