महाराष्ट्र में सत्ताधारी शिवसेना ने कहा है कि कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग को ताली बजाकर, थाली पीटकर या दीये जलाकर नहीं जीता जा सकता. अपने मुखपत्र सामना में एक संपादकीय में पार्टी का यह भी कहना है कि लोगों ने प्रधानमंत्री की इस अपील का गलत अर्थ निकाला. इसमें कहा गया है, ‘पीएम मोदी को साफ-साफ कहना चाहिए कि वे देशवासियों से क्या उम्मीद करते हैं और जो लोग आदेश नहीं मानेंगे उन्हें सजा दी जानी चाहिए.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बीच बीते रविवार रात नौ बजे नौ मिनट के लिए घरों की लाइट बंद करने और दरवाजे पर दिए-मोमबत्ती जलाने की अपील की थी. देश भर में लोगों ने उत्साह से इस पर प्रतिक्रिया दी. इससे पहले उन्होंने लोगों से 22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करने और कुछ देर के लिए अपने घरों के मुख्य दरवाजे पर बाहर आकर तालियां, घंटी या थाली बजाकर कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ रहे लोगों का आभार जताने का आह्वान किया था.

उधर, 35 और मौतों के साथ ही भारत में कोरोना वायरस से मरने वालों का आंकड़ा 162 तक पहुंच गया है. पीटीआई के मुताबिक इसकी चपेट में आने वालों की संख्या पांच हजार को पार (5192) कर गई है. पिछले 24 घंटे के दौरान अलग-अलग राज्यों में कोरोना वायरस के 500 से भी ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं. इस तरह देखा जाए तो 24 घंटे के भीतर यह कोरोना वायरस से दर्ज मौतों और संक्रमणों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. महाराष्ट्र ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां संक्रमण के मामलों का आंकड़ा 1000 के ऊपर पहुंच गया है. इस बीच, यह भी खबर आ रही है कि कोरोना वायरस के चलते घोषित 21 दिन के मौजूदा देशव्यापी लॉकडाउन को आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श जारी है. यह लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म होना है.