कोरोना वायरस का प्रकोप पूरी दुनिया में जारी है. लोग इस वायरस से इस कदर घबराये हुए हैं कि वे इससे बचने के लिए कोई भी उपाय अपनाने को तैयार हो जाते हैं. ऐसा ही कुछ पिछले दिनों देखने को मिला. बीते महीने सोशल मीडिया पर अमेरिका के कैंसस सिटी स्थित सेंट ल्यूक अस्पताल का एक पत्र वायरल हो गया. इस पत्र में लिखा था, ‘व्यापक शोध के बाद, हमारे निष्कर्ष से पता चलता है कि एल्कोहल युक्त पेय पदार्थों का सेवन कोरोना वायरस (कोविड-19) के खतरे को कम कर सकता है.’ पत्र में आगे लिखा था कि एल्कोहल में भी वोदका का सेवन करना और इसे सैनिटाइजर की तरह इस्तेमाल करना कोविड-19 के खिलाफ सबसे ज्यादा कारगर है.’

सोशल मीडिया पर इस पत्र के वायरल होने के बाद दुनिया भर में अचानक शराब की बिक्री में इजाफा देखा गया. ईरान जहां अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं का भारी अभाव है, में भी लोगों ने इस पत्र पर भरोसा करके बड़ी मात्रा में शराब का सेवन किया. ईरान में शराब पीने और बेचने पर प्रतिबंध लग हुआ है, ऐसे में लोगों ने तस्करों से शराब खरीदी, नतीजा यह हुआ कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जहरीली शराब पीने से 44 लोगों की मौत हो गयी.

इस घटना के बाद सेंट ल्यूक अस्पताल ने उस पत्र का खंडन किया जिसमें शराब पीने से वायरस का खतरा कम होने की बात कही गयी थी. अस्पताल ने एक बयान जारी कर कहा, ‘वे सभी रिपोर्ट्स पूरी तरह गलत हैं जिनमें शराब पीने से कोरोना वायरस संक्रमण कम होने का दावा किया गया है. सेंट ल्यूक अस्पताल अमेरिका के सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के दिशानिर्देशों का पालन करता है.’

ईरान में हुई घटना के तुरंत बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने भी लोगों के लिए एक सलाह जारी की. इसमें कहा गया, ‘नहीं, शराब पीने से कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव नहीं होता है. जो लोग शराब नहीं पीते हैं उन्हें संक्रमण को रोकने के प्रयास में पीना शुरू नहीं करना चाहिए.’ डब्लूएचओ ने आगे कहा कि जो लोग एल्कोहल का सेवन हमेशा से करते आ रहे हैं, उन्हें इस समय इसका सेवन कम या बंद कर देना चाहिए क्योंकि इससे उनके वायरस की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है.

कोरोना वायरस (सार्स कोव-2 वायरस) पिछले सालों में सामने आये ‘मार्स-कोव’ और ‘सार्स-कोव’ वायरसों के समूह का हिस्सा है. ‘मार्स-कोव’ और ‘सार्स-कोव’ के मामले में प्रमाणित हो चुका है कि इनसे लड़ने के लिए इंसान का इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होनी चाहिए. और एल्कोहल सीधे तौर पर इम्यून सिस्टम को ही कमजोर करता है. कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो ज्यादा शराब पीने से श्वसन प्रणाली, सांस की नली और फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंचता है, इससे निमोनिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है.

कोरोना वायरस के मामले में यह साबित हो चुका है कि यह मुख्य रूप से इंसान की श्वसन प्रणाली और फेफड़ों पर ही असर करता है. हाल ही में चीन में हुए एक शोध में यह भी पता लगा कि जिन लोगों के फेफड़े पहले से खराब थे, उनमें कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से खतरनाक स्थिति में पहुंच गया.

एल्कोहल को सफाई के लिए और सैनिटाइजर के तौर पर कैसे इस्तेमाल करें?

एल्कोहल को किसी वायरस या बैक्टीरिया को खत्म करने के अच्छे विकल्पों में गिना जाता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एल्कोहल की अधिकतम 70 फीसदी मात्रा को पानी में मिलाकर सफाई करने से कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है. इसी मात्रा के साथ इसे ऐलोवेरा में मिलाकर इसे हैंड सैनिटाइज़र की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि बाजार में मिलने वाले जिन हैंड सैनिटाइज़र्स में एल्कोहल की मात्रा 60 फीसदी तक हो, वे कोरोना वायरस के खिलाफ प्रभावी हैं.