कोरोना वायरस से उपजे संकट से काफी हद तक निकल चुका चीन अब बाकी देशों की इससे उबरने में मदद करने की बात कह रहा है. उसने कई देशों को मास्क और दस्ताने जैसे बचाव उपकरण और कोरोना वायरस के टेस्टिंग किट भेजे हैं. लेकिन उसकी यह कवायद विवाद के घेरे में आ गई है. ताजा मामले में फिनलैंड ने कहा है कि चीन ने उसे जो 20 लाख मास्क भेजे हैं वे अस्पताल जैसे माहौल में कोरोना वायरस से बचाव के उसके मानकों पर खरे नहीं उतरते. हालांकि वहां की सरकार का कहना है कि इन्हें आवासीय इलाकों और घरों में बुजुर्गों की देखभाल के लिए जाने वाले लोगों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

फिनलैंड को इस समय रोज करीब पांच लाख सर्जिकल मास्क और 50 हजार रेसपिरेटर मास्क की जरूरत है. उसने अपने यहां की कुछ कंपनियों को रोज दो लाख मास्क बनाने का आदेश दिया है. लेकिन इन्हें बनाने का काम इस महीने के आखिर तक ही शुरू हो सकेगा.

चीन में बने मास्कों की शिकायत करने वाला फिनलैंड अकेला देश नहीं है. बीते कुछ समय के दौरान स्पेन, नीदरलैंड्स, तुर्की और ऑस्ट्रेलिया ने भी वे मास्क वापस लौटाए हैं जो उन्होंने चीन से खरीदे थे. इस पर चीन सरकार का कहना है कि इन देशों को पहले ठीक से यह जांच करनी चाहिए थी कि उन्हें कैसे मास्क चाहिए. कुछ दिन पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने एक ट्वीट कर दावा किया था कि चीनी कंपनियों ने साफ-साफ कहा था कि जो मास्क भेजे जा रहे हैं वे नॉन सर्जिकल हैं.

उधर, कनाडा से भी चीन द्वारा भेजे गए मास्कों के मानकों के अनुरूप न होने की शिकायतें आ रही हैं. यहां के टोरंटो शहर के प्रशासन का कहना है कि इसके चलते कम से कम 62600 सर्जिकल मास्क वापस भेजे गए हैं. प्रशासन के मुताबिक इनकी गुणवत्ता खराब थी और ये आसानी से फट रहे थे.

उधर, चीन से कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए तीन लाख 40 हजार किट खरीदने वाले स्पेन ने कहा है कि इनमें से 60 हजार किट खराब निकले. इस पर स्पेन में चीन के दूतावास का कहना है कि जिस कंपनी ने ये किट भेजे थे उसके पास ऐसे प्रोडक्ट बेचने का लाइसेंस नहीं है.

लेकिन जिन कंपनियों के पास लाइसेंस है उनके मास्कों को लेकर भी शिकायतें आ रही हैं. नीदरलैंड्स भी चीन से खरीदे गए करीब छह लाख मास्क लौटा चुका है. उसका कहना है कि चीन सरकार के गुणवत्ता प्रमाणपत्र यानी क्वालिटी सर्टिफिकेट के बाद भी ये मास्क न तो ठीक से फिट हो रहे थे और न ही उनके फिल्टर ठीक से काम कर रहे थे. इसी तरह तुर्की ने भी चीन से मिले कई टेस्टिंग किटों के सटीक न होने का दावा किया है.