भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोरोना वायरस संकट को भविष्य पर मंडरा रही काली छाया जैसा बताया है. केंद्रीय बैंक ने आज अपनी मौद्रिक नीति रिपोर्ट में कहा कि इसके चलते घोषित लॉकडाउन का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. आरबीआई का कहना था कि कोविड-19 (कोरोना वायरस के चलते होने वाली बीमारी) की वजह से पूरी दुनिया में उत्पादन, वितरण व्यवस्था, कारोबार और पर्यटन पर बुरा असर पड़ा है.

रिजर्व बैंक की यह रिपोर्ट कोरोना वायरस की वजह से घोषित 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन के 16वें दिन आई है. केंद्रीय बैंक ने कहा है कि इस महामारी से पहले अर्थव्यवस्था के 2020-21 में मंदी से उबरने की आशाएं जग रही थीं, लेकिन अब परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है. रिजर्व बैंक ने बीती 31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष यानी 2019-20 में विकास दर पांच फीसदी रहने का अनुमान लगाया है. उसका यह भी कहना है कि 31 मार्च 2021 को खत्म होने वाले वित्तीय वर्ष में यह 5.5 फीसदी रह सकती है. 2019-20 की आखिरी तिमाही में विकास दर का डेटा मई के आखिर तक जारी किया जाएगा.