मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कोरोना वायरस को लेकर मोदी सरकार और शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधा है. कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनवाने की वजह से देश में लॉकडाउन लगाने का फैसला देरी से लिया. कांग्रेस के दिग्गज नेता ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, ‘मैंने 20 मार्च को इस्तीफा दे दिया था, लेकिन 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद लॉकडाउन की घोषणा की गई.’ कमलनाथ ने आगे कहा, ‘कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 12 फरवरी को ही कोरोना महामारी को लेकर देश को आगाह किया था. इसके बावजूद पीएम नरेंद्र मोदी को लॉकडाउन की घोषणा में 40 दिन लग गए. मैं संक्षेप में कहना चाहता हूं कि किस प्रकार से केंद्र सरकार का पूरा ध्यान मध्यप्रदेश की सरकार को गिराने में रहा और इस दौरान उन्होंने इतनी बड़ी विपदा को भी नजर अंदाज कर दिया.’

इस दौरान कमलनाथ का यह भी कहना था कि उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए काफी पहले ही कदम उठाने शुरू कर दिए थे. उनके मुताबिक, ‘मुख्यमंत्री के रूप में मैंने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जांच के लिए कुछ निर्णय लिए थे. मैंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कदम उठाए थे. आठ मार्च को शॉपिंग मॉल, स्कूलों आदि को बंद करने का आदेश दे दिया था.’

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने शिवराज सिंह चौहान की सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने कहा कि यह इकलौता राज्य है जहां ऐसी विपदा के समय भी स्वास्थ्य मंत्रालय में कोई मंत्री नहीं है. उनका कहना था, ‘मध्यप्रदेश के संदर्भ में मैं लोगों को कुछ बातें याद दिलाना चाहता हूं. मध्यप्रदेश पूरे विश्व में एक ही प्रदेश है, जहां न तो स्वास्थ्य मंत्री है और न ही गृह मंत्री.’