दुनिया भर में कोरोना वायरस का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है. भारत सहित पूरी दुनिया में सवा लाख से ज्यादा लोग इसके चलते अपनी जान गवां चुके हैं. इस महामारी के चलते आम लोग ही नहीं दुनिया भर के बड़े नेताओं का भी दूसरे देशों में आना-जाना बेहद कम या फिर बंद हो गया है. भारत की तरफ से देखें तो सबसे बड़े नेताओं में विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोरोना काल में विदेश यात्राएं की हैं. ये दोनों हाल ही में रूस और फिर ईरान की यात्रा पर गए थे. राजनाथ सिंह ने बीते जून में भी रूस की यात्रा की थी.

लेकिन, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल के दौरान विदेश का रुख नहीं किया. अगर आंकड़ों को देखें तो आज विदेश से लौटे हुए उन्हें पूरे दस महीने हो गए हैं. बीते साल 15 नवंबर को वे दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील की दो दिवसीय यात्रा से लौटे थे. इसके बाद से वे किसी भी विदेश यात्रा पर नहीं जा पाए हैं.

आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी ने हर साल नवंबर से लेकर सितंबर तक कितने देशों की यात्राएं कीं. यह भी कि वे इससे पहले कब-कब लंबे समय तक देश में ही रुके रहे और रुकने की वजह क्या थी?

नवंबर 2014 से सितंबर 2015

नरेंद्र मोदी मई 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने थे. इसके बाद अगले चार महीनों यानी सितंबर तक उन्होंने अमेरिका सहित पांच देशों की यात्रा कर ली थी. इसके बाद उन्होंने नवंबर 2014 से लेकर सितंबर 2015 तक यानी 11 महीनों में कुल 24 देशों की यात्राएं की. नवंबर में वे म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया, फिजी और नेपाल की यात्रा पर गए. इसके बाद मार्च 2015 में उन्होंने सेशेल्स, मॉरीशस, श्रीलंका और सिंगापुर की यात्रा की. इसी साल अप्रैल में पहली बार बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने यूरोप का रुख किया और फ्रांस एवं जर्मनी की यात्रा की.

2015 की फ्रांस की यात्रा बीते दिनों काफी चर्चा में रही थी और इसे लेकर भारत में काफी सियासी घमासान हुआ था. इसकी वजह थी कि इसी यात्रा में भारत और फ्रांस के बीच रफाल लड़ाकू विमान खरीदने पर सहमति बनी थी. 2018 में फ्रांसीसी खबरिया वेबसाइट ‘मीडियापार्ट’ ने फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का एक बयान छापा था. इसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री की फ्रांस यात्रा के दौरान भारत सरकार ने रफाल सौदे में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को शामिल करने का प्रस्ताव रखा था. हालांकि, इन विवादों का इस डील पर कोई असर नहीं पड़ा और सरकार ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि 36 विमानों की डील फाइनल हो चुकी है. इस डील के तहत ही बीते जुलाई में फ़्रांस ने पांच रफाल लड़ाकू विमानों की पहली खेप भारत को सौंप दी.

बहरहाल, 2015 के अप्रैल महीने से लेकर सितंबर तक प्रधानमंत्री ने 14 देशों की यात्राएं की. इनमें कनाडा, चीन, मंगोलिया, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, उज्बेकिस्तान, कजाख्स्तान, रूस, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, आयरलैंड और अमेरिका शामिल हैं. अगस्त 2015 में नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी गए थे. उनके रूप में कोई भारतीय प्रधानमंत्री 34 साल बाद यूएई पहुंचा था.

नवंबर 2015 से सितंबर 2016

नवंबर 2015 से लेकर सितंबर 2016 तक पीएम नरेंद्र मोदी ने कुल 26 मुल्कों की यात्रा की. 2015 नवंबर में वे पहली यात्रा पर ब्रिटेन गए. इसके बाद वे इसी महीने तुर्की, मलेशिया और सिंगापुर गए. दिसंबर में उन्होंने फ्रांस, रूस और अफगानिस्तान की आधिकारिक यात्राएं की. अफगानिस्तान की इसी यात्रा के बाद प्रधानमंत्री ने एक ऐसा निर्णय लिया जिसने भारत सहित पूरी दुनिया को चौंका दिया था. 25 दिसंबर को काबुल से निकलने के बाद अचानक नरेंद्र मोदी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से मिलने लाहौर पहुंच गए. लाहौर हवाई अड्डे पर शरीफ़ ने खुद मोदी की अगवानी की. इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से नवाज़ शरीफ़ के घर रायविंद पैलेस पहुंचे और उनकी नातिन की शादी में शरीक हुए. इसके बाद मार्च 2016 में पीएम मोदी बेल्जियम और अप्रैल में सऊदी अरब के दौरे पर गए. मार्च 2016 में वे अमेरिका में हुए परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मलेन में भी हिस्सा लेने गए थे. यह यात्रा एक दिन की थी.

इसी साल मई से लेकर सितंबर तक प्रधानमंत्री ने 15 देशों की यात्राएं कीं, इनमें अफगानिस्तान और अमेरिका दो ऐसे देश हैं जिनकी यात्रा पर प्रधानमंत्री एक साल में दूसरी बार गए. इसके अलावा वे जिन देशों की यात्रा पर गए थे, उनमें ईरान, क़तर स्विट्जरलैंड, मैक्सिको, उज्बेकिस्तान, अफ्रीका के दक्षिण में स्थित छोटे देश मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, केन्या, वियतनाम और चीन शामिल हैं. सितंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में शामिल होने लाओस गए थे.

नवंबर 2016 से सितंबर 2017

नरेंद्र मोदी के अब तक के पूरे कार्यकाल में नवंबर 2016 से लेकर सितंबर 2017 तक की समयावधि ऐसी है जब उन्होंने सबसे कम (13) देशों यात्राएं कीं. इस दौरान उन्होंने शुरूआती छह महीनों में यानी नवंबर 2016 से अप्रैल 2017 की समयावधि में केवल तीन दिन ही विदेश में गुजारे. इस दौरान उन्होंने केवल थाईलैंड और जापान का दौरा ही किया. इन छह महीनों के दौरान नरेंद्र मोदी के कम यात्रायें करने की वजह उत्तर प्रदेश के चुनाव को माना जाता है. फरवरी और मार्च 2017 में हुए इस चुनाव के लिये प्रधानमंत्री ने जनवरी से ही प्रचार करना शुरू कर दिया था.

उत्तर प्रदेश के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को बड़ी जीत दिलवाने के एक महीने बाद प्रधानमंत्री ने फिर विदेश का रुख किया और अगले पांच महीनों में 11 देशों की यात्रायें की. मई में वे सबसे पहले एक दिन के लिए श्रीलंका पहुंचे फिर इसी महीने के अंत में उन्होंने जर्मनी, स्पेन और रूस की यात्रा की. 2 जून को रूस से सीधे फ्रांस का रुख किया. जून 2017 में पीएम मोदी ने कजाखस्तान, पुर्तगाल, अमेरिका और नीदरलैंड का दौरा भी किया. इस साल जुलाई में वे इजरायल और सितंबर में चीन और म्यांमार के दौरे पर गए. जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने एक दिन के लिए जर्मनी भी गए थे.

नवंबर 2017 से सितंबर 2018

नवंबर 2017 से सितंबर 2018 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई ऐसे देशों का दौरा किया जहां कई दशकों से कोई भारतीय प्रधानमंत्री नहीं गया था. नवंबर में फिलीपींस और जनवरी में स्विटजरलैंड जाने के बाद उन्होंने फरवरी में एक के बाद एक चार मुस्लिम देशों - जॉर्डन, यूएई, फिलस्तीन और ओमान का दौरा किया. नरेंद्र मोदी के रूप में कोई भारतीय प्रधानमंत्री 58 साल बाद फिलस्तीन, 30 साल बाद जॉर्डन और 10 साल बाद ओमान पहुंचा था. इसके बाद अप्रैल में प्रधानमंत्री ने स्वीडन, ब्रिटेन, जर्मनी और चीन की यात्रा की. इस साल अगले पांच महीनों के दौरान नरेंद्र मोदी ने 10 देशों की यात्राएं की, इनमें उन्होंने नेपाल का दो बार दौरा किया.

नवंबर 2018 से सितंबर 2019

नवंबर 2018 से सितंबर 2019 के बीच पीएम मोदी 15 देशों की यात्राओं पर गये. इस दौरान कुछ देशों की यात्राओं पर वे दो बार भी गए. नवंबर 2018 में उन्होंने सिंगापुर, मालदीव और अर्जेंटीना का दौरा किया. इसके बाद फरवरी 2019 में उन्होंने दक्षिण कोरिया की दो दिवसीय यात्रा की. इसके बाद लोकसभा चुनाव के चलते अगले तीन महीने वे देश में ही रहे. लोकसभा का चुनाव निपटने के बाद जून 2019 से प्रधानमंत्री ने फिर विदेश यात्रा शुरू की और 11 देशों की यात्रायें कीं. इस दौरान उनकी जो विदेश यात्रा सुर्ख़ियों में रही थी, वह बहरीन की थी. दरअसल, नरेंद्र मोदी के रूप में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने मध्यपूर्व के इस छोटे मुस्लिम देश की सरजमीं पर अपने कदम रखे थे.

नवंबर 2019 से सितंबर 2020

बीते सालों में अगर देखें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय तक विदेश यात्रा पर तब नहीं गए, जब देश में कोई महत्वपूर्ण चुनाव था. ऐसा पहली बार ही हुआ है कि देश में कोई बड़ा चुनाव नहीं है और प्रधानमंत्री इतने लंबे समय से देश में हैं. कोरोना वायरस संकट के चलते बीते मार्च में उनका बांग्लादेश का दौरा रद्द हो गया था. इसके बाद मार्च में ही इसी कारण से उन्हें अपना यूरोप का दौरा भी रद्द करना पड़ा.

हालांकि, मार्च से पहले प्रधानमंत्री के विदेश न जाने की वजह जानकार कोरोना वायरस के संकट को नहीं मानते. इनके मुताबिक 15 नवंबर 2019 से लेकर फरवरी 2020 तक प्रधानमंत्री नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के चलते विदेश नहीं गए. दुनिया भर में भारत सरकार के इस कदम का विरोध हो रहा था. यही नहीं, यूरोप से लेकर अमेरिका और मध्यपूर्व से लेकर चीन तक में सत्ताधारी नेता इस कानून को लेकर नरेंद्र मोदी की आलोचना कर रहे थे. विश्लेषकों की मानें तो ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी असहज स्थिति से बचने के लिए घर में बैठना ही बेहतर समझा.