1-बीते महीने दिल्ली समेत देश के तमाम महानगरों से प्रवासी मज़दूरों की हुई वापसी के बाद कोरोना वायरस का प्रकोप ग्रामीण भारत तक फैलने का खतरा लगातार बना हुआ है. ऐले हालात में अलीगढ़ का जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) कोरोना वायरस के मामलों की टेस्टिंग के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तक़रीबन पांच करोड़ जनसंख्या की एकमात्र उम्मीद जैसा है. लेकिन इसकी मौजूदा स्थिति कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की जंग की एक चौंकाने वाली और भयावह तस्वीर पेश करती है. बीबीसी पर प्रियंका दुबे की रिपोर्ट.

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2-कोरोना वायरस की अर्थव्यवस्था पर भी तगड़ी चोट पड़ना तय है. किसान-मजदूर से लेकर व्यापारी-कारोबारी तक सबसे इससे प्रभावित हो रहे हैं या होंगे. इनमें से हर कोई चाहता है कि सरकार ज्यादा से ज्यादा राहत दे. मजदूरों के खाते में पैसा ट्रांसफर हो, व्यवसायियों को बड़ा पैकेज दिया जाए, राज्यों को ज्यादा वित्तीय सहायता मिले और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा खर्च हो. लेकिन इस सबके लिए पैसा कहां से आएगा? द प्रिंट हिंदी पर टीएस नाययन की टिप्पणी.

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3-कोरोना वायरस इन गर्मियों में मशहूर मलीहाबादी आम की मिठास भी हल्की कर सकता है. आम के सीजन में उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद क्षेत्र से रोजाना करीब 200 से 300 ट्रक देश भर की मंडियों में जाते हैं. अगर कोरोना वायरस का असर मई-जून में भी ऐसा ही बना रहा और लॉकडाउन भी चलता रहा तो तो इसका असर मलीहाबाद के आम कारोबार पर भी पड़ेगा. इस वक्‍त भी तालाबंदी की वजह से आम की फसल की देख-रेख को लेकर किसान और व्‍यापारी परेशान हैं. डाउन टू अर्थ हिंदी पर रणविजय सिंह की रिपोर्ट.

मलीहाबाद के ‘आम’ कारोबार पर कोरोना का साया, व्‍यापारी और किसान परेशान

4-अब तक कहा जा रहा था कि कोरोना वायरस वुहान के मीट बाजार से फैला जहां चमगादड़ बेचे जा रहे थे. लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि कि उस बाजार में चमगादड़ थे ही नहीं और वायरस चीन की लैब से निकला है. उधर, चीन लगातार इस तरह के आरोपों को खारिज करता रहा है. तो सच्चाई क्या है? डॉयचे वेले हिंदी पर फाबियान श्मिट की रिपोर्ट.

क्या चीन की प्रयोगशाला से निकला कोरोना वायरस?

5- भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण संकट गंभीर होने का संबंध तब्लीगी जमात से जोड़ती खबरों की इन दिनों भरमार है. हाल में इंडिया टूडे टीवी ने अपने प्राइम टाइम शो ‘न्यूज़ट्रैक’ में एनसीआर के तीन मदरसों को कोरोना हॉटस्पॉट करार दिया. चैनल का दावा था कि तीनों मदरसों के मुखियाओं ने लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए जानबूझकर छात्रों को तंग जगह पर पुलिस से छुपाकर रखा. चैनल ने यह दावा भी किया कि इन मदरसों के प्रभारियों का तबलीगी जमात से संबंध है. इस दावे की पड़ताल करती न्यूजलॉन्ड्री हिंदी पर चित्रांशु तिवारी की रिपोर्ट.

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