दुनिया पर कोरोना वायरस की मार जारी है. इसके संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा दो लाख पार कर चुका है. 30 लाख से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में हैं. संकट को काबू करने की कोशिशें जारी हैं. इसके लिए जो उपाय अपनाए जा रहे हैं उनमें से एक लॉकडाउन भी है. लोगों के घर से बाहर निकलने पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं. एक अनुमान के मुताबिक इस समय दुनिया की दो-तिहाई आबादी लॉकडाउन का सामना कर रही है. भारत सहित कई देश इस लॉकडाउन को या तो बढ़ा चुके हैं या बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. मुख्यमंत्रियों के साथ अपनी सबसे ताजा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोरोना वायरस से ज्यादा प्रभावित राज्यों में तीन मई के बाद लॉकडाउन एक बार फिर बढ़ाने की बात कही है.

सवाल यह है कि यह लॉकडाउन कब तक रहेगा. इस बारे में तमाम जानकारियां खंगालने के बाद जो जवाब सामने आता है वह यही है कि दुनिया को अभी कुछ समय तक लॉकडॉउन के किसी न किसी स्वरूप का सामना करना ही है, यह बात तमाम विशेषज्ञ और एजेंसियां बार-बार कह रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इनमें शामिल है. संस्था ने बीते दिनों कहा कि यह वायरस जल्दी जाने वाला नहीं है और इसलिए यह लड़ाई लंबी चलेगी. डब्ल्यूएचओ के मुखिया टेड्रॉस ऐडहॉनम गीब्रियेसस का यह भी कहना था कि आंकड़े भले ही बड़े लग रहे हों, लेकिन सच यही है कि दुनिया के ज्यादातर देशों में अभी इससे पैदा हुई महामारी यानी कोविड-19 शुरुआती दौर में ही है.

कई दूसरे जानकारों की मानें तो कहना मुश्किल है कि मामलों का पीक यानी चरम कब आएगा जिसके बाद बीमारी ढलान के रास्ते पर पांव बढ़ाएगी. अभी तो अफ्रीका जैसा विशाल महाद्वीप शेष है जिसके बारे में माना जा रहा है कि संक्रमण का अगला केंद्र वही होगा और इसके चलते कोरोना वायरस के मामलों और इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा अभी कई गुना ऊपर जा सकता है.

लेकिन जहां हालात कुछ संभलते दिख रहे हैं, वहां भी अभी काफी समय तक एहतियात बरते जाने की जरूरत होगी. जैसा कि डब्ल्यूएचओ ने भी कहा कि कुछ देशों को लगता था कि उन्होंने कोरोना वायरस पर काबू पा लिया है, लेकिन वहां अब फिर से इसके मामले बढ़ रहे हैं. यही वजह है कि एजेंसी ने दुनिया के सभी देशों से अपील की है कि अभी वे एहतियात बरतना जारी रखें. यानी दूसरे शब्दों में उसने आगाह किया है कि लॉकडाउन को अभी पूरी तरह से न हटाया जाए.

असल में कोरोना वायरस से जुड़ी जो भी बुनियादी बातें हैं वे बीते चार महीने के दौरान वहीं की वहीं हैं. मसलन न तो अभी तक इस वायरस का कोई इलाज खोजा जा सका है और न ही इससे बचाव का कोई टीका बन पाया है. अभी यह भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि एक बार संक्रमण होने पर इसके खिलाफ कोई इम्यूनिटी विकसित हो जाती है या नहीं. और अगर यह होती भी है तो कितने दिनों तक रहती है. जानकारों के मुताबिक ऐसे में संक्रमण के मामले बहुत कम रह जाने के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य करना बहुत मुश्किल होगा क्योंकि लॉकडाउन के हटते ही मामले फिर इतनी तेजी से बढ़ने लगेंगे कि अब तक की सारी मेहनत बेकार हो जाएगी. कुल मिलाकर बात घूम-फिरकर वहीं आ जाती है कि लॉकडाउन को किसी न किसी स्वरूप में अभी बनाए रखना होगा.

जानकारों के मुताबिक लॉकडाउन न होने की स्थिति में कोरोना वायरस की चपेट में आया कोई शख्स इसका पता चलने तक औसतन तीन लोगों तक संक्रमण पहुंचा सकता है. यानी इस तरह होने वाले संक्रमणों में 60-70 फीसदी कटौती होने पर ही मामलों का ग्राफ ढलने की उम्मीद की जा सकती है. अभी की स्थिति में इसके लिए इंसानों के प्रत्यक्ष संपर्क को जितना कम करने की जरूरत है वह लोगों के एक-दूसरे से दूर रहने से ही संभव है. भले ही ऐसा स्वैच्छिक हो या फिर जबरन. अगर हम ऐसा नहीं चाहते तो विकल्प के तौर पर कोई ऐसा उपाय खोजना होगा जो वायरस को फैलने से रोक सके.

लेकिन जैसा कि जिक्र हो ही चुका है, ऐसा कोई उपाय अब तक नहीं आया है. असल में दवाओं और वैक्सीनों के विकसित होने की एक तय प्रक्रिया होती है. कितनी भी कोशिशों के बावजूद जानकार मानते हैं कि अभी कोरोना वायरस से बचाव या इसके इलाज का विकल्प सामने आने में एक से डेढ़ साल लग सकता है. बीते दिनों ही रेमडेसिवियर नाम की वह एंटी वायरल दवा पहले ही रैंडमाइज्ड क्लीनिकल ट्रायल में असफल रही जिसे कोरोना वायरस के इलाज की दिशा में बड़ी उम्मीदों के साथ देखा जा रहा था. बताया जा रहा है कि साइड इफेक्ट्स के कारण ट्रायल को पहले ही रोक दिया गया.

शायद इसीलिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कुछ दिन पहले कहा कि लॉकडाउन अभी जारी रखना होगा. उनके मुताबिक अभी उनके लिए यह कहना मुश्किल है कि इस स्थिति में बदलाव कब होगा और वह बदलाव क्या होगा. ब्रिटिश प्रधानमंंत्री थोड़े ही दिन पहले कोरोना वायरस के चलते आईसीयू पहुंच गए थे. उधर, उनके विदेश मंत्री डॉमिनिक राब का कहना है कि लोगों को अब एक नई सामान्य स्थिति की आदत डालनी होगी. उनके मुताबिक व्यापारिक प्रतिष्ठानों और फैक्ट्रियों को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी सावधानियां बरतनी होंगी. ब्रिटिश विदेश मंत्री का यह भी कहना है कि अब लंबे समय तक आपस में दो मीटर की दूरी रखने, ग्राहक-सेल्समैन के बीच प्रत्यक्ष संपर्क न रखने और कैश के इस्तेमाल से बचने जैसे उपाय भी करने होंगे.

यानी कुछ ढील भले ही मिल जाए, लेकिन लॉकडाउन अभी जारी रहने वाला है.