कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी रोके जाने को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है. एक ट्टीट में उन्होंने इसे अमानवीय फैसला बताया. राहुल गांधी का कहना था, ‘लाखों करोड़ की बुलेट ट्रेन परियोजना और केंद्रीय विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को निलंबित करने की बजाय कोरोना से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता काटना सरकार का असंवेदनशील तथा अमानवीय निर्णय है.’

असल में बीते मार्च में मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में चार फीसदी की बढ़ोतरी की थी. इसके बाद कर्मचारियों को 17 के बजाए 21 फीसदी महंगाई भत्ता मिलना था. लेकिन अब सरकार ने इस बढ़ोतरी पर रोक लगा दी है. यह रोक जुलाई 2021 तक रहेगी. यानी तब तक भत्ता 17 फीसदी ही रहेगा. सरकार के इस फैसले का असर करीब 48 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ने की आशंका है.

बताया जा रहा है कि इस कदम से केंद्र सरकार को चालू वित्त वर्ष यानी 2020-21 और अगले वित्त वर्ष यानी 2021-22 में कुल मिलाकर 37,530 करोड़ रुपये की बचत होगी. आमतौर पर इस मामले में राज्य सरकारें भी केंद्र के रास्ते पर चलती हैं. तो अगर राज्य सरकारें भी जुलाई 2021 तक महंगाई भत्ते की बढ़ी दर को रोकती हैं तो उन्हें 82,566 करोड़ रुपये तक की बचत होगी. यानी कुल मिलाकर केंद्र और राज्यों के स्तर पर इससे 1.20 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. इससे कोरोना वायरस संकट के चलते पैसे की कमी से जूझ रही सरकारों को मदद मिलेगी.