हबल एक ऐसा अमेरिकी-यूरोपीय अंतरिक्ष दूरदर्शी है, जो पिछले तीन दशकों से ब्रह्मांड में दूर-दूर तक की झांकियां दिखा रहा है. हबल ने ब्रह्मांड के बारे में हमारे ज्ञान को उलट-पुलट दिया है. एक से एक ऐसे रहस्यों का उद्घाटन किया है, जिनकी खगोलविद कल्पना तक नहीं कर पा रहे थे. खगोल विज्ञान में तो उसने अपनी धूम मचायी ही है, धरती पर की तथाकथित ‘पॉप संस्कृति’ का भी अंग बन गया है. खगोलशास्त्री एडविन हबल के नाम वाले इस दूरदर्शी को, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने, इस बीच इतिहास बन गये अपने शटल यानों में से एक ‘डिस्कवरी’ के द्वारा, 24 अप्रैल 1990 के दिन अंतरिक्ष में भेजा था. ‘डिस्कवरी’ ने किसी यात्री-बस जितने बड़े इस दूरदर्शी को अगले ही दिन पृथ्वी से 540 किलोमीटर दूर की उसकी परिक्रमाकक्षा में पहुंचा दिया.

हबल ने तब से अब तक 13 लाख अवलोकन किये हैं. उनके आधार पर 15,000 से अधिक वैज्ञानिक शोधपत्र आदि प्रकाशित हुए हैं. हबल परियोजना के कई वर्षों तक प्रमुख रहे डेविड लेक्रोन का कहना है, ‘हबल ने ब्रह्मांड के बारे में हमारी दृष्टि को नाटकीय ढंग से साफ़-सुथरा कर दिया है.’ हबल जिस ऊंचाई पर से ब्रहामांड की अनन्त गहराईयों में झांकते हुए पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है, वहां न तो हवा है और न धूल-धक्कड़. वह अदृश्य अवरक्त (इन्फ्रारेड) किरणों से लेकर दृश्यमान प्रकाश और पराबैंगनी (अल्ट्रवायोलेट) किरणों तक के पूरे विद्युतचुंबकीय वर्णक्रम (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम) को समेटते हुए काम करता है.

गैलेक्सियों के मध्य में दैत्याकार ब्लैक-होल

हबल ने खगोल विज्ञान के लगभग हर क्षेत्र से जुड़ी ऐसी जानकारियां दी हैं, जो पृथ्वी पर के दूरदर्शी नहीं दे पा रहे थे. उदाहरण के लिए, हबल ने ही इस अनुमान की पुष्टि की कि हम अंतरिक्ष में दूर-दूर तक फैली जो ज्योतिर्मालाएं (गैलेक्सियां) देखते हैं, उनके मध्य में एक से एक दैत्याकार ब्लैक-होल बैठे होते हैं. वे ही उन्हें नचाते हैं और उन्हीं के कारण ब्रह्मांड निरंतर बढ़ती हुई गति से फैल रहा है. हबल दूरदर्शी ने इस फैलाव की गति को जिस सटीकता के साथ मापा है, वह भी अपूर्व बतायी जाती है.

उसी के अवलोकनों का एक उदाहरण हैं ऐसी ज्योतिर्मालाएं(आकाशगंगा या मंदाकिनी केवल हमारे सौरमंडल वाली गैलेक्सी को कहा जाता है), जो हमारी आकाशगंगा से ‘हबल-अर्धव्यास’ के आधे के बराबर (लगभग 4.5 गीगापारसेक्स या 14.7 अरब प्रकाशवर्ष) दूर हैं. उनकी एक-दूसरे से परे हटने की गति प्रकाश की गति से भी अधिक हो सकती है!

आइंस्टाइन का सापेक्षतावाद सिद्धांत

आइंस्टाइन के विशिष्ट सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार हालांकि ऐसा नहीं हो सकता. किंतु खगोलविदों का कहना है कि ऐसा तब सचमुच नहीं हो सकता, जब दिक-काल (स्पेस-टाइम) सपाट हों और परिवर्तनशील न हों. इसके विपरीत आइंस्टाइन का ही सामान्य सापेक्षतावाद का सिद्धांत ऐसी स्थितियों को संभव मानता है, जिनमें पहले से ही गतिशील दो पृथक वस्तुएं प्रकाश की गति से भी अधिक गति के साथ एक-दूसरे से परे जाती लगें. तब उनकी एकल गतियों का योगफल प्रकाश की गति से भी अधिक हो सकता है.

हमारे घुमावदार दिक-काल में यह संभव है. हमारा ब्रह्मांड परिवर्तनशील भी है. एक-दूसरे से परे हटती वस्तुओं को देख पाना इस पर निर्भर करता है कि ब्रहमांड के विस्तार का इतिहास कितना नया या पुराना है. हमारे ब्रह्मांड की वे ज्योर्मालाएं, जो ब्रह्मांडीय क्षितिज के पीछे कहीं हैं, यानी 16 अरब प्रकाशवर्ष से दूर कहीं हैं, उनका इन दिनों चला प्रकाश पृथ्वी तक कभी नहीं पहुंचेगा. पर हम उनका वह प्रकाश आगे भी देख पायेंगे, जो आज से पहले कभी वहां से चला होगा.

प्रोटोप्लानेटरी’ बादल

हबल दूदर्शी ने ग्रहों-उपग्रहों और तारों को जन्म देने वाले धूल और गैस के उन तश्तरी-नुमा जमघटों को भी खोज निकाला, जिन्हें ‘प्रोटोप्लानेटरी’ बादल कहा जाता है. उनसे उस समय की परिस्थितियों की एक झलक मिलती है, जब ब्रह्मांड की उत्पत्ति वाले महाधमाके (बिगबैंग) को बहुत अधिक समय नहीं बीता था. वास्तव में, हबल दूदर्शी को तीन दशक पूर्व जब अंतरिक्ष में भेजा गया था, तब यह ठीक से पता भी नहीं था कि उसे क्या-क्या खोजना है या वह क्या कुछ खोज सकता है.

उस समय तक पता नहीं था कि हमारे सौरमंडल से बाहर भी ऐसे तारे हैं, जिनके पास अपने ग्रह-उपग्रह हैं. हबल ने ही 2001 में हमारे सौरमंडल से बहुत दूर के एक ग्रह तथा उसके वायुमंडल का सुराग दिया. तब से अब तक वह इस प्रकार के 100 से अधिक बाह्यग्रहों (एक्ज़ो प्लैनेट) के वायुमंडलों को जांच-परख चुका है. वहां सोडियम, पोटैशियम या जलवाष्प होने का पता लगा चुका है.

अंतरिक्ष की झाकियां दिखायीं

हबल ऐसा पहला अंतरिक्ष-आधारित दूरदर्शी था, जिसने पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिकों को अंतिरक्ष में अपू्र्व दूरियों तक की झाकियां दिखायी हैं. उसी ने हमारे सौरमंडल से बाहर की अन्य सौर-प्रणालियों और उनके ग्रहों की खोज के नवयुग का शुभारंभ किया. बाद में बाह्यग्रहों की खोज के लिए बने ‘केप्लर’ जैसे विशेष दूरदर्शियों की सहायता से, 2अप्रैल 2020 तक, कुल 4,144 बाह्यग्रहों की खोज हो चुकी थी. कम से कम 691 ऐसे सौरमंडल मिले हैं, जिनमें एक से अधिक ग्रह हमारे सूर्य जैसे अपने तारे की परिक्रमा कर रहे हैं.

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ‘ईसा’ (ईएसए/यूरोपियन स्पेस एजेंसी) की एक वैज्ञानिक अन्तोनेला नोता के शब्दों में, ‘हबल ने ब्रह्मांड को हमारे घरों में पहुंचा दिया.’ हबल सिर्फ़ अमेरिका का ही नहीं है. ‘ईसा’ के माध्यम से यूरोपीय देश भी उसके निर्माण और परिचालन में 15 प्रतिशत अंशदान के साथ शामिल हैं. उसकी खोजों से यूरोपीय वैज्ञानिक भी लाभान्वित होते हैं. हबल द्वारा लिये गये फ़ोटो यूरोपीय पत्र-पत्रिकाओं में ही नहीं, पुस्तकों, पोस्टरों, फ़िल्मों, बाइबल की जिल्दों, यहां तक तकियों-रज़ाइयों के गिलाफ़ों पर भी छपे मिलते हैं. यह दूरदर्शी अंतरिक्ष की खोज का पर्याय बन गया है.

प्रक्षेपण तक लागत 4 अरब 70 करोड़ डॉलर

13 मीटर लंबा और सवा चार मीटर व्यास वाला हबल दूरदर्शी, अंतिरक्ष में भेजे जाने से पहले पृथ्वी पर 11 टन 600 किलोग्रम भारी था. अंतरिक्ष में वह लगभग भारहीन है. हर 95.4 मिनट पर वह पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है. उसके निर्माण की आरंभिक अनुमानित लागत 40 करोड़ डॉलर थी. पर अंतिरक्ष में उसके प्रक्षेण तक बढ़ते-बढ़ते 4 अरब 70 करोड़ डॉलर हो गयी. 2010 में उसके प्रक्षेपण की 20 वीं वर्षगांठ तक कुल ख़र्च 10 अरब डॉलर हो गया था. अब तक कुल मिलाकर पांच बार उसकी मरम्त आदि के लिए अंतरिक्ष यात्रियों को उसके पास भेजना पड़ा है; अंतिम बार 2009 में.

30 साल अंतरिक्ष में रह कर हबल तकनीकी दृष्टि से अब काफ़ी पुराना हो चुका है. उसकी जगह लेने के लिए नासा दो नये अंतरिक्ष दूरदर्शियों का निर्माण कर रहा है. पहला है साढ़े छह अरब डॉलर की लगात वाला ‘जेम्स वेब’ अंतरिक्ष दूरदर्शी और दूसरा है ‘वाइड फ़ील्ड इन्फ्रारेड सर्वे टेलिस्कोप (WFIRST).’ ‘जेम्स वेब’ को पृथ्वी से लगभग 26 लाख किलोमीटर दूर एक ऐसी कक्षा में स्थापित करने की योजना है, जहां सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्तियां एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देती हैं. इस जगह को ‘लग्रांज प्वाइन्ट-2’ कहा जाता है. जेम्स वेब को 2018 में प्रक्षेपित करने की योजना थी, पर अब उसे मार्च 2021 में भेजा जायेगा. हबल बूढ़ा ज़रूर हो गया है, पर अभी भी अपना काम किये जा रहा है.