फिल्मों का जरा सा भी शौक रखने वालों में शायद कोई भी ऐसा न होगा जिसे इरफान के जाने की खबर सुनकर अपने भीतर कुछ चटकता न लगा हो. ऐसा होना अकारण नहीं. इस अभिनेता ने ऐसे तमाम किरदार जिए जिनसे हम सभी कभी न कभी जरूर दो-चार हुए होंगे - कभी बाहर तो कभी अपने भीतर. एक तरह से कहें तो इरफान ‘लार्जर दैन लाइफ’ नहीं थे. उनकी कीर्ति का कारण था - साधारण को असाधारण बनाना.

वैसे तो यह बात और भी कई अभिनेताओं के बारे में कही जा सकती है, लेकिन बुदबुदा गांव के बिल्लू से लेकर लाइफ इन ए मेट्रो के मॉन्टी और नेमसेक के अशोक गांगुली तक जो विशाल रेंज इरफान के पास थी, वह शायद ही इस दौर के किसी दूसरे अभिनेता के पास रही हो. यही वजह है कि इस अभिनेता की मौत सबके लिए एक बहुत निजी किस्म की उदासी ले आई है.

इनमें सुपरस्टार शाहरूख खान भी शामिल हैं जिन्होंने कभी कहा था कि इरफान से सीखने के लिए उन्होंने प्रियदर्शन की फिल्म ‘बिल्लू’ में काम किया था. यह फिल्म 2009 में आई थी. आज उनकी मौत की खबर सुनकर शाहरुख ने ट्वीट किया, ‘मेरे दोस्त...(मेरी) प्रेरणा और हमारे समय के महानतम अभिनेता. अल्लाह आपकी रूह को सुकून बख्शे इरफान भाई... मैं आपको बहुत याद करूंगा और उतना ही इस बात को भी आप हमारी जिंदगी का हिस्सा थे.’ शाहरुख और इरफान बहुत अच्छे दोस्त थे.

लेकिन इरफान से जुड़ाव का अहसास होने के लिए उनका बहुत अच्छा दोस्त होना जरूरी नहीं था. एक ट्वीट में चर्चित अभिनेत्री विद्या बालन ने लिखा है, ‘मेरा आपसे कोई खास परिचय नहीं था. लेकिन मेरे आंसू नहीं रुक रहे क्योंकि आपने जो किरदार निभाए उन्होंने मुझे बहुत निजी तौर पर छुआ था. मुझे लगता है कि यही आपका जादू है और ये हमेशा रहेगा.’

सोशल मीडिया की टाइमलाइनों से गुजरते हुए क्या खास क्या आम, सबकी टिप्पणियों में कहीं कम कहीं ज्यादा यही भाव दिखता है. भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अधिकारी परवीन कस्वान लिखते हैं, ‘सबको आज लग रहा है कि उसका कोई निजी नुकसान हुआ है. ये बताता है कि इरफान खान लोगों से किस तरह जुड़े हुए थे. मुझे लगता है कि उन्होंने सभी को ये अहसास करवाया कि आखिर में प्रतिभा की कद्र होती है. टोंक का एक आम आदमी लोगों को अपने सपनों पर यकीन करना सिखा सकता है. मेहनत आखिर में रंग लाती है. कला लोगों से जुड़ती है.’ यानी अपने हर काम को असाधारण बनाने वाले इरफान ने अपने साथ भी ठीक ऐसा ही किया था. यही वजह है कि आशीष स्वरूप नाम के एक यूजर ने लिखा है, ‘ऐसा लगता है जैसे घर में ही कुछ हुआ है.’ ऐसी बातों का एक लंबा सिलसिला है.

इरफान खान एक ऐसे अभिनेता थे जिनकी छाप दिलों में हमेशा बनी रहती है. मीरा नायर की ‘द नेमसेक’ के एक दृश्य में उनका किरदार अपने बेटे से कहता है - ‘हमेशा याद रखना. याद रखना कि तुमने और मैंने ये यात्रा की और हम साथ-साथ वहां पहुंचे जहां से आगे जाने के लिए कुछ बचा ही नहीं.’ एक मायने में यह वैसा ही पड़ाव है. अब इरफान चाहने वालों की यादों में ही बचे हैं.