1- दुनिया पर कोरोना वायरस की बढ़ती मार के बीच प्लाज्मा थेरेपी को एक बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है. कई मरीजों के इससे ठीक होने की खबरें भी आई हैं. उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे लेकर चेतावनी दी है. मंत्रालय के मुताबिक इसके पर्याप्त सबूत नहीं है कि प्लाज्मा थेरेपी को कोविड-19 के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इस पूरे मुद्दे को लेकर बीबीसी हिंदी पर गुरप्रीत सैनी की रिपोर्ट.

कोरोना वायरस: प्लाज़्मा थेरेपी क्यों है ख़तरनाक?

2-दुनिया की मुसीबत बने कोरोना वायरस संक्रमण के बीच भारत में इसे लेकर एक वर्ग हिंदू बनाम मुस्लिम की लड़ाई में उलझा दिखता है. कइयों का आरोप है कि इस वर्ग के एक हिस्से को सत्ताधारी भाजपा का समर्थन प्राप्त है. लेकिन द प्रिंट हिंदी पर अपने इस लेख में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य शेषाद्री चारी इस आरोप को खारिज करते हैं.

हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अविश्वास कोविड महामारी से लड़ाई में बाधक है, मोदी सरकार ऐसा कभी नहीं चाहेगी

3-इन दिनों इस्लाम में सबसे पवित्र माना जाने वाला महीना रमजान चल रहा है. लेकिन कोरोना वायरस से उपजे संकट ने इस महीने की रंगत बदल दी है. पुरानी दिल्ली में रमजान के माहौल को लेकर दैनिक भास्कर पर राहुल कोटियाल की रिपोर्ट.

दिल्ली की जामा मस्जिद से / शाम के सात बजते ही मस्जिद की मीनारों से अजान तो हमेशा की तरह हुई, लेकिन सजदे में झुकने वाले सर नदारद रहे

4- कोरोना वायरस के चलते हुई तालाबंदी का असर बाकी क्षेत्रों के साथ-साथ हिंदी फिल्म उद्योग पर भी पड़ा है. फिल्मों की शूटिंग से लेकर दूसरे तमाम काम इसके चलते ठप हैं. डॉयचे वैले की इस रिपोर्ट का कहना है कि उद्योग को महामारी के असर से बाहर निकलने में लंबा समय लग जाएगा.

महामारी के असर से बाहर निकलने में बॉलीवुड को लगेंगे दो साल

5-मानव का पूरा इतिहास ब्रह्मांडीय काल पर एक छोटी सी बिंदी जितना ही होगा. फिर भी मानवजाति ने पिछले कुछ सौ वर्षों में ब्रह्मांड के बारे में बहुत कुछ ज्ञान इकट्ठा किया है. लेकिन यह सारा ज्ञान भी ब्रह्मांड के पांच प्रतिशत की प्रकृति के बारे में ही बताता है. डाउन टू अर्थ हिंदी पर विवेक मिश्रा और अक्षित संगोमला की रिपोर्ट.

95 फीसदी ब्रह्मांड को हम नहीं जानते लेकिन क्यों?