केंद्र सरकार लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनें चला रही है. लेकिन, इससे जुड़ा रेल मंत्रालय का एक फैसला विवादों की वजह बनता जा रहा है. रेल मंत्रालय ने इन ट्रेनों के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए हैं, उनमें राज्य सरकारों से मजदूरों से ट्रेन का किराया वसूलने की बात कही गयी है.
दिशानिर्देशों में कहा गया है, ‘जहां से ट्रेन शुरू होगी, उस राज्य को ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों की संख्या रेलवे को बतानी होगी..इसके बाद रेलवे गंतव्य स्थान के लिए सभी यात्रियों का टिकट काटकर स्थानीय राज्य सरकार प्रशासन को दे देगा. प्रशासन ये टिकट यात्रियों को दे देगा और उनसे इसका किराया वसूल कर पूरी राशि वापस रेलवे में जमा करा देगा.’

मजदूरों से टिकट वसूले जाने को लेकर विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. इनका कहना है कि मजदूरों से किराया नहीं वसूला जाना चाहिए और यह पैसा केंद्र सरकार को ही देना चाहिये.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए सवाल किया है कि कोरोना महामारी के लिए बनाया गया पीएम केयर्स फंड आखिर कहां है? उमर ने एक ट्वीट में लिखा, ‘अगर आप कोविड-19 (कोरोना वायरस) संकट के समय विदेश में फंसे हुए हैं तो सरकार आपको मुफ्त वापस लेकर आएगी. लेकिन अगर आप कोई प्रवासी मजदूर हो और दूसरे राज्य में फंसे हो तो आपको यात्रा का खर्च उठाना होगा (वो भी सोशल डिस्टेंसिंग कॉस्ट के साथ). पीएम केयर्स फंड कहां गया?’
If you are stuck abroad during this COVID crisis this government will fly you back for free but if you are a migrant worker stranded in another state be prepared to cough up the cost of travel (with social distancing cost added). Where did “PM Cares” go?
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) May 3, 2020
मजदूरों से किराया वसूलने के मामले पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी मोदी सरकार को घेरा है. अखिलेश यादव ने एक ट्वीट में लिखा, ‘ट्रेन से वापस घर ले जाए जा रहे गरीब, बेबस मज़दूरों से भाजपा सरकार द्वारा पैसे लिए जाने की ख़बर बेहद शर्मनाक है. आज साफ़ हो गया है कि पूंजीपतियों का अरबों माफ़ करने वाली भाजपा अमीरों के साथ है और गरीबों के ख़िलाफ़. विपत्ति के समय शोषण करना सूदखोरों का काम होता है, सरकार का नहीं.’ अखिलेश यादव ने भी पीएम केयर्स फंड के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किये हैं.
ट्रेन से वापस घर ले जाए जा रहे गरीब, बेबस मज़दूरों से भाजपा सरकार द्वारा पैसे लिए जाने की ख़बर बेहद शर्मनाक है. आज साफ़ हो गया है कि पूँजीपतियों का अरबों माफ़ करनेवाली भाजपा अमीरों के साथ है और गरीबों के ख़िलाफ़.
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 3, 2020
विपत्ति के समय शोषण करना सूदखोरों का काम होता है, सरकार का नहीं.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मजदूरों से किराया वसूलने के फैसले को गलत बताया है. एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हमें प्रवासी मजदूरों से टिकटों के पैसे देने को नहीं कहना चाहिए. वे हर तरह से व्यथित हैं. यदि केंद्र नहीं करता है, तो झारखंड सरकार इसका भुगतान करने के तरीके ढूंढेगी, लेकिन हम निश्चित रूप से मजदूरों से पैसे नहीं लेंगे.’
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