गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव को मंजूरी देने के पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि चुनाव कराने के बजाए पाकिस्तान को यह इलाका तुरंत खाली करना चाहिए. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों सरकार को गिलगित-बाल्टिस्तान में आम चुनाव कराने और इससे संबंधित केंद्रीय कानून में संशोधन का आदेश दिया था. भारत की प्रतिक्रिया इसी आदेश पर आई है.

भारत के मुताबिक पाकिस्तान को गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उसने यहां अवैध कब्जा किया हुआ है. विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘हमने पाकिस्तान को साफ बता दिया है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान कानूनी तौर पर भारत का हिस्सा हैं. अवैध कब्जे वाले इस हिस्से पर पाकिस्तान सरकार या वहां की अदालतें कोई फैसला नहीं ले सकतीं. भारत इन हरकतों को कभी सहन नहीं करेगा.’

भारत की ब्रिटेन से आजादी से पहले गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा हुआ करता था. जब कश्मीर के महाराजा हरी सिंह ने रियासत के भारत में विलय पर सहमति जताई तो यहां विद्रोह हो गया. यहां तैनात डोगरा गवर्नर को भगा दिया गया और फिर पाकिस्तान के सैनिकों ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया. 1970 में पाकिस्तान ने इसे प्रशासनिक रूप से पाक अधिकृत कश्मीर से अलग कर दिया था. राष्ट्रपति जिया उल हक के राज में यहां की जनसांख्यिकी को बदलने का भी काम हुआ. यहां शियाओं की आबादी ज्यादा थी सो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों से सुन्नी समुदाय के लोगों को लाकर यहां बसाया गया.

पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को विवादित इलाका बताते हुए वहां जनमत संग्रह कराए जाने की मांग करता रहा है. दूसरी ओर भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और भारत में उसका विलय कानूनी है, सो गिलगित-बाल्टिस्तान भी उसका है.

इस इलाके का सामरिक महत्व भी है. गिलगित-बाल्टिस्तान की सीमा चीन और अफगानिस्तान से लगती है. चीन की चर्चित इकॉनॉमिक कॉरिडोर योजना यहां से गुजरती है और पाकिस्तान को चीन से जोड़ने वाला काराकोरम हाईवे भी इसी इसी क्षेत्र में है.