चर्चित अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि भारत को लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े राहत पैकेज की जरूरत है. उनके मुताबिक अभी तक जो राहत पैकेज घोषित हुआ है वह काफी नहीं है. अभिजीत बनर्जी का कहना था, ‘अमेरिका जीडीपी के 10 फीसदी जैसे आंकड़े तक चला गया है, लेकिन हम अभी भी एक फीसदी की बात कर रहे हैं.’

अभिजीत बनर्जी ने ये बातें कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आयोजित एक संवाद के दौरान कहीं. नोबेल विजेता कहना था कि सरकार ने कर्ज के भुगतान पर तीन महीने की रोक लगाकर अच्छा काम किया है, लेकिन बेहतर होता कि वह इस भुगतान को खुद करने का ऐलान करती. उनके मुताबिक अभी जो स्थिति है उसमें जो भी मांगे उसे राशन कार्ड दे देने चाहिए तभी जरूरतमंदों की ज्यादा से ज्यादा मदद हो सकेगी.

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अर्थशास्त्र का नोबेल अभिजीत बनर्जी और फ्रांस की इश्तर डुफ्लो को अमेरिका के माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से दिया गया था. इन्हें ये पुरस्कार वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन के लिए किये गये इनके काम के लिये दिया गया. नोबेल समिति ने अपने बयान में कहा कि इन अर्थशास्त्रियों के प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण ने मात्र दो दशक में विकास केंद्रित अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदल दिया है.

अभिजीत बनर्जी ( 58) ने कलकत्ता विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. इसके बाद 1988 में उन्होंने हावर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की. मौजूदा समय में वे मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर हैं. वे संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ‘2015 के बाद के विकासात्मक एजेंडा पर विद्वान व्यक्तियों की उच्च स्तरीय समिति’ के सदस्य भी रह चुके हैं.

इससे पहले राहुल गांधी ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के साथ भी एक संवाद किया था. इस चर्चित अर्थशास्त्री का कहना है कि कोरोना वायरस संकट के चलते घोषित लॉकडाउन को आगे बढाना विनाशकारी होगा. उनका यह भी कहना था कि इस संकट के प्रभावित गरीबों की मदद के लिए करीब 65 हजार करोड़ रु की जरूरत है.