केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 20 लाख करोड़ रु के उस पैकेज के कुछ अहम बिंदुओं के बारे में जानकारी दी जिसका ऐलान कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. आज की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) पर केंद्रित रही. निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगले कुछ दिनों में और भी क्षेत्रों के लिए बड़े ऐलान होंगे.

1-सरकार ने एमएसएमई के लिए तीन लाख करोड़ रु के कर्ज की घोषणा की है. यह कर्ज कोलैटरल फ्री होगा यानी इसके लिए किसी गारंटी या कुछ गिरवी रखने की जरूरत नहीं होगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘इन उद्योगों के सामने पैसे की कमी है और ये भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ये उद्योग बारह करोड़ से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देते हैं.’

2-सरकार ने जिस नए कर्ज का ऐलान किया है उसकी समयसीमा चार साल की होगी. पहले एक साल में मूलधन चुकाने की बाध्यता नहीं होगी. ये कर्ज 31 अक्तूबर 2020 तक उपलब्ध होंगे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस कदम का फायदा करीब 45 लाख इकाइयों को होगा. इसके अलावा इस क्षेत्र में लगे जो लोग अपने कारोबार का विस्तार करना चाहते हैं लेकिन पैसे की कमी से ऐसा नहीं कर पा रहे, उनके लिए फंड ऑफ फंड्स बनाया जा रहा है. इसके लिए पचास हज़ार करोड़ रु रखे गए हैं.

3-मुश्किलों से जूझ रही एमएसएमई इकाइयों के लिए 20 हजार करोड़ रु का फंड बनाया गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि जो इकाइयां एनपीएम में तब्दील हो गई हैं या जो इस तरह के जोखिम से जूझ रही हैं, उन्हें इस फंड के जरिये कर्ज दिया जाएगा. शर्त यह है कि ये इकाइयां चल रही हों. सरकार सूक्ष्म और लघु इकाइयों के लिए बने क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) को भी चार हजार करोड़ रु की पूंजी देगी. वित्त मंत्री के मुताबिक इससे करीब दो लाख इकाइयों को फायदा होगा.

4-वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि एमएसएमई की परिभाषा भी बदली जा रही है. उदाहरण के लिए वह निवेश सीमा भी बढ़ाई जाएगी जिसके आधार पर किसी कंपनी को एमएमएमई का दर्जा मिलता है. वित्त मंत्री के मुताबिक इससे किसी कंपनी का आकार निर्धारित सीमा से ज्यादा हो जाने पर भी उसे इस क्षेत्र के लिए घोषित उपायों का फायदा मिलता रहेगा.

5-वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 200 करोड़ रु तक की सरकारी खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर खत्म करने की घोषणा की है. यह खरीद अब देश के भीतर से ही की जाएगी. वित्त मंत्री ने कहा कि इससे भी एमएसएमई को फायदा होगा क्योंकि उन्हें अपना कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगा. उनके मुताबिक इस सिलसिले में नियमों में संशोधन जल्द ही किया जाएगा. निर्मला सीतारमण के मुताबिक यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम है.

6-प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत सरकार 72 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड खाते में मार्च, अप्रैल और मई का पैसा पहले ही डाल चुकी है. इसके तहत उसने नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का 12-12 फीसदी हिस्सा वहन किया है. निर्मला सीतारमण के मुताबिक यह योजना अगले तीन महीने यानी जून, जुलाई और अगस्त में भी जारी होगी. इसके लिए 2500 करोड़ रु रखे गए हैं. इससे 3.67 व्यापारिक प्रतिष्ठानों को फायदा होगा.

7-कर्मचारी और नियोक्ता ईपीएफ खाते में 12-12 प्रतिशत का योगदान करते हैं. अब सरकार ने इसे बदल कर दस प्रतिशत कर दिया है. वित्त मंत्री के मुताबिक ऐसा इसलिए किया गया है कि कर्मचारी के हाथ में ज्यादा वेतन आए और नियोक्ता की जेब पर कम वजन पड़े. उनके मुताबिक इससे लोगों को कुल 6750 करोड़ रु का फायदा होगा. हालांकि केंद्रीय सरकारी संस्थानों के लिए यह आंकड़ा 12-12 प्रतिशत ही रहेगा.

8-गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूट्स के लिए तीस हजार करोड़ की विशेष योजना लाई जा रही है. वित्त मंत्री ने कहा कि आज के मुश्किल हालात में इन संस्थाओं को बाजार से पैसा उठाने में दिक्कत हो रही है. उनके मुताबिक सरकार इनके लिए पैसे की व्यवस्था करेगी तो हाउसिंग सेक्टर और एमएसएमई सेक्टर को बल मिलेगा और आखिर में इसका फायदा आम लोगों तक पहुंचेगा.

9-सरकार ने उन कांट्रेक्टरों यानी ठेकेदारों को भी छह महीने की राहत दी है जो देश भर में रेलवे, सड़क या केंद्र सरकार के किसी विभाग का काम कर रहे हैं. यानी उनका काम अगर बीते-दो तीन महीने में पूरा होना था तो अब वे इसे अगले छह महीने में पूरा कर सकते हैं. इसका उन्हें कोई खामियाजा नहीं भुगतना होगा. यही नहीं, अगर किसी ने 70 फ़ीसदी काम कर दिया है तो उसके एवज में बैंक गारंटी रिलीज की जा सकती है ताकि ठेकेदार के हाथ में पैसा आ सके और वह आगे काम कर सके.

10-कल से 31 मार्च 2021 तक टीडीएस दरों और टीसीएस दरों को मौजूदा दर से 25 फीसदी तक घटा दिया गया है. वित्त मंत्री के मुताबिक इससे आम जनता को 50 हजार करोड़ रु तक का फायदा मिलेगा. आयकर रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख भी 31 जुलाई से बढ़ाकर 30 नवंबर की जाएगी.