देश के सभी सीआरपीएफ़ और बीएसएफ़ जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की कैंटीनों में सिर्फ़ स्वदेशी उत्पाद ही बेचे जाएंगे. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तरफ़ से दिया गया यह आदेश इस एक जून से प्रभावी होगा. अमित शाह ने बुधवार को ट्वीट के ज़रिए इस जानकारी को सार्वजनिक किया है. इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में स्वदेशी उत्पादों का अधिकतम उपयोग करने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि हमें लोकल के लिए वोकल होना पड़ेगा. गृह मंत्रालय की इस नई क़वायद को उसी अपील से जोड़कर देखा जा रहा है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपनी इस घोषणा के बारे में बयान जारी कर कहा है कि ‘सीएपीएफ के कैंटीनों से प्रतिवर्ष क़रीब 2800 करोड़ रुपए की ख़रीद की जाती है. नए आदेश के बाद देश के क़रीब 10 लाख सीपीएएफ कर्मियों के परिवारों के 50 लाख सदस्य भारत में बने उत्पादों को उपयोग में लेंगे.’

हालांकि, सीएपीएफ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक़ विस्तृत दिशानिर्देश मिलने के बाद ही ‘स्वदेशी उत्पादों’ की परिभाषा तय की जा सकेगी. ये सूत्र बताते हैं कि ‘यदि स्वदेशी उत्पादों से मतलब भारत में बनने वाले उत्पादों से है तो गृहमंत्रालय के नए आदेशों से शायद ही कोई बड़ा फ़र्क़ देखने को मिलेगा क्योंकि सीएपीएफ के कैंटीनों में तक़रीबन वे ही उत्पाद बेचे जाते हैं जिन्हें भारत में ही तैयार किया गया हो.’

एक सीएपीएफ अधिकारी के शब्दों में, ‘सिर्फ़ कुछ इलैक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे, मोबाइल फ़ोन या लैपटॉप को छोड़कर इन कैंटीनों में शायद ही कोई विदेशी सामान बेचा जाता होगा!’ वहीं एक दूसरे अधिकारी कहते हैं, ‘कैंटीनों में बेचे जाने वाली कारें भी महिंद्रा की ही होती हैं.’

यह दूसरी बार है जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ केंटीनों में स्वदेशी उत्पाद बेचने पर ज़ोर दिया है. बीते साल जब गृहमंत्री अमित शाह ने पहली बार सीएपीएफ कैंटीन मुख्यालयों का दौरा किया था, तब भी उन्होंने कुछ ऐसे ही निर्देश दिए थे. सूत्र बताते हैं कि इसके बाद से सीएपीएफ केंटीनों ने खादी ग्रामोद्योग में बने उत्पादों को बड़े स्तर पर मंगवाना शुरु कर दिया था.