सुप्रीम कोर्ट ने वह याचिका खारिज कर दी है जिसमें अनुरोध किया गया था कि वह केंद्र सरकार को सड़कों पर चल रहे प्रवासी मजदूरों को खाना और पानी उपलब्ध करवाने का आदेश दे. शीर्ष अदालत ने कहा, ‘इस बारे में राज्य फैसला करें. अदालत इसमें क्या सुनवाई या फैसला करेगी?’ सुप्रीम कोर्ट का कहना था, ‘लोग चले जा रहे हैं. हम इसे कैसे रोकें?’ याचिका में हाल में महाराष्ट्र में हुए उस हादसे का भी जिक्र किया गया था जिसमें पटरी पर सो रहे 16 मजदूर एक मालगाड़ी से कुचले गए थे. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘अगर वे रेल की पटरियों पर सो जाएंगे तो ऐसे हादसे कोई कैसे रोक सकता है?’

अदालत ने याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता को झाड़ भी लगाई. उसका कहना था कि यह याचिका सिर्फ मीडिया में छप रही खबरों पर आधारित है और इन दिनों खबरों के आधार पर हर कोई अपने आपको विशेषज्ञ समझने लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘हम आपको विशेष पास देते हैं. क्या आप सरकारी आदेश लागू करवा सकते हैं.’ उधर, केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार ने प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के उपाय पहले ही शुरू कर दिए हैं. उनका कहना था, ‘सबको परिवहन का साधन मिलेगा.’

डेढ़ महीने से भी ज्यादा समय से जारी देशव्यापी लॉकडाउन के बीच इन दिनों दसियों हजार मजदूर और उनके परिवार सड़कों पर हैं. वे शहरों से दूर-दराज स्थित अपने घरों को लौट रहे हैं. इनमें से कई की मंजिल तो सैकड़ों किलोमीटर दूर है और वे पैदल ही चले जा रहे हैं. कई मजदूर सड़क हादसों में भी मारे गए हैं. उधर, गृह मंत्रालय ने हाल में राज्यों के लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि मजदूर सड़कों या रेल की पटरियों पर न चलें. राज्यों से उन्हें इस बारे में आश्वस्त करने के लिए भी कहा गया है कि उनके लिए हरसंभव बंदोबस्त होगा.