भारत में देशव्यापी लॉकडाउन 31 मई तक के लिए लगा हुआ है. हालांकि, इस बार लॉकडाउन के दौरान कई तरह की सहूलियतें दी गयी हैं. इसी तरह दुनिया के कई अन्य देशों ने भी महीनों से चले आ रहे लॉकडाउन को या तो हटा दिया है या फिर लोगों और व्यवसाइयों को कुछ सहूलियतें दी हैं. अमेरिका और यूरोप के सबसे ज्यादा प्रभावित देशों ने भी अपने यहां लॉकडाउन खोल दिया है. आइए जानते हैं कि इन देशों ने अपने यहां किस तरह से लॉकडाउन हटाया है.

स्पेन

यूरोपीय देश स्पेन इस समय कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों की सूची में तीसरे नंबर पर है. स्पेन में 25 मई तक दो लाख 82 हजार मामले सामने आ चुके हैं और 27 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. बीते 28 अप्रैल को लगातार कुछ हफ़्तों से कोरोना के मामलों में गिरावट के बाद प्रधानमंत्री पेड्रो सान्चेज़ ने देशव्यापी लॉकडाउन को खत्म करने का एलान किया. उन्होंने इसे चार चरणों में हटाने की नीति पेश की.

लॉकडाउन हटाने का पहला चरण बीती चार मई से शुरू हुआ. इस दिन से छोटे-छोटे स्पेनिश द्वीप, जो कोरोना से सबसे कम प्रभावित थे, उन्हें लॉकडाउन से छूट दी गई. इन द्वीपों पर छोटी दुकानों, सैलून और ब्यूटी पार्लर्स को खोला गया. रेस्टोरेंट और बारों को भी अनुमति मिली, लेकिन इन्हें केवल पैकिंग और होम डिलीवरी करने की इजाजत ही दी गई.

एक हफ्ते बाद 11 मई से दूसरे चरण में स्पेन की सरकार ने पूरे देश को लॉकडाउन से निजात दे दी. शहरों में ज्यादा प्रभावित इलाकों को छोडकर बाकी सभी जगहों पर बाजारों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के साथ खोल दिया गया. छोटे व्यवसायों जैसे जिम आदि को अपॉइंटमेंट के आधार पर सेवा देने को कहा गया. जिम, दुकानों और लाइब्रेरी जैसी जगहों पर एक बार में केवल 10 लोगों के आने की ही अनुमति दी गई. दूसरे चरण के दौरान सरकार ने रेस्टोरेंट्स को खाने की होम डिलीवरी करने के साथ-साथ उन्हें खुली जगह पर 30 फीसदी ग्राहकों को खाना खिलाने की अनुमति भी दे दी. कंपनियों को भी 30 फीसदी कर्मचारियों के साथ खोल दिया गया.

स्पेन में मई के अंत में लॉकडाउन खोलने का तीसरा चरण शुरू होने वाला है. इस चरण में सरकार रेस्टोरेंट्स को 30 फीसदी क्षमता के साथ बंद जगह पर भी ग्राहकों को खाना परोसने की इजाजत दे रही है. तीसरे चरण में सिनेमा हाल, थिएटर और कला प्रदर्शनियों को भी कम लोगों के साथ खोलने की बात कही गई है.

स्पेन में आठ जून से लॉकडाउन खोलने का चौथा और आखिरी चरण शुरू होगा. इस दौरान बड़े शॉपिंग सेंटर, बार और नाइट क्लब 30 फीसदी क्षमता के साथ खोले जाएंगे. सरकार ने आठ जून से सभी तरह की कम्पनियों को खोलने की इजाजत भी दी है, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के साथ-साथ हर कर्मचारी के लिए पीपीई किट पहनना अनिवार्य किया गया है. स्पेन सरकार ने साफ़ कहा है कि शिक्षण संस्थान इनमें से किसी भी चरण में नहीं खोले जाएंगे.

इटली

कोरोना वायरस फैलने की शुरुआत में यूरोपीय देश इटली इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था. हालांकि, अब वह कोरोना से पीड़ित देशों की सूची में पांचवें नंबर पर आ गया है. इटली में अब तक दो लाख 30 हजार लोग संक्रमित हुए हैं, जबकि करीब 33 हजार लोगों की मौत हुई है. बीते दो हफ़्तों से वहां संक्रमितों और मौतों के आंकड़ों में लगातार गिरावट देखी जा रही है.

कोरोना वायरस के कम होते मामलों को देखते हुए इटली की सरकार ने भी बीती चार मई से दो महीनों के कड़े लॉकडाउन में ढील दे दी. इसके तहत सरकार ने लोगों को एक ही राज्य के अंदर आवाजाही की इजाजत तो दी है लेकिन, इस दौरान लोगों को अपने स्वास्थ्य संबंधी सर्टिफिकेट अपने पास रखने होंगे. लोग अब पार्क में भी जा सकते हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना पड़ेगा और मास्क लगाना पड़ेगा. पिकनिक और भीड़ जुटाने वाले सभी कार्यक्रमों पर अभी भी पूरी तरह से रोक लगी हुई है. इटली की सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियम के साथ कैथोलिक चर्च भी खोल दिए हैं, लेकिन उन्हें अभी भी कोई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं है. देश में चार मई से ही अंतिम संस्कार में 15 लोगों को शामिल करने की इजाजत भी दे दी गयी है.

इटली में अब थोक की दुकानों, रियल एस्टेट और विनिर्माण जैसी गतिविधियों को भी शुरू करने की अनुमति दे दी गयी है. साथ ही रेस्टोरेंट और बार्स को भी खोल दिया गया है. हालांकि सरकार ने इन्हें केवल होम डिलीवरी और पैकिंग करने को ही कहा है. लॉकडाउन से जुड़े दिशानिर्देशों में इटली की केंद्रीय सरकार ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे एक जून से बार, रेस्टोरेंट, हेयरड्रेसर और ब्यूटी सैलून पूरी तरह खोल सकते हैं. हालांकि, उसने स्कूल-कॉलेज कम से कम सितंबर के महीने तक बंद रखने के संकेत दिए हैं.

फ्रांस

बीती 7 मई को फ्रांस सरकार ने कोरोना वायरस के घटते मामलों को देखते हुए लॉकडाउन में ढील देने की घोषणा की. प्रधानमंत्री एडुओर्ड फिलिप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स को संबोधित करते हुए कहा कि संक्रमितों की संख्या, कोविड-19 के नए मामलों की दर और टेस्टिंग क्षमता के आधार पर शहरों को रेड और ग्रीन जोन में बांटा जाएगा और चार दिन बाद कुछ दिशानिर्देशों के साथ लॉकडाउन में ढील दी जायेगी.

इसके बाद 11 मई से वहां लॉकडाउन में ढील दे दी गई. इसके तहत ग्रीन जोन में बड़ी दुकानों, पुस्तकालयों, कब्रिस्तानों, गिरजाघरों, छोटे संग्रहालयों, पार्कों, हेयर ड्रेसर्स और पार्लर्स को खोल दिया गया. हालांकि, रेड जोन में केवल दुकानों, हेयरड्रेसर्स और पार्लर्स को ही खोले जाने की अनुमति दी गयी. यह भी कहा गया कि इन जगहों पर एक साथ अधिकतम दस लोग ही होने चाहिए. फ्रांस में लॉकडाउन के दौरान होम डिलीवरी करने वाले रेस्टोरेंट्स, कैफे और बार को खोलने की अनुमति अभी नहीं दी गई है. हालांकि, सरकार का कहना है कि जून में रेस्टोरेंट खोले जा सकते हैं.

लॉकडाउन खोलने के दिशानिर्देशों के तहत लोग अब अपने घर से 100 किमी की दूरी तक आवाजाही कर सकते हैं. हालांकि, सरकार ने 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के बाहर निकलने पर प्रतिबंध जारी रखा है. फ्रांस की सरकार ने यात्रा के दौरान मास्क को अनिवार्य करते हुए बसों और लोकल ट्रेनों को 50 फीसदी यात्रियों के साथ चलाने की मंजूरी भी दी है. सरकार ने 11 मई से देश के एक-तिहाई (करीब 40 हजार) प्राइमरी स्कूल भी खोल दिए. लेकिन इस फैसले के कुछ रोज बाद जब अलग-अलग स्कूलों में 70 से ज्यादा छात्र और अध्यापक कोरोना पॉजिटिव पाए गए तो इन्हें बंद कर दिया गया.

अमेरिका

अमेरिका कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है. यहां अब तक इसके संक्रमण के 15 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और करीब 91 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. अमेरिका में अभी भी हर रोज 20 हजार के आसपास नए मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन, इसके बावजूद बीती 17 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन चरणों में लॉकडाउन को खोले की घोषणा कर दी. इसमें सभी राज्यों के गवर्नर्स से राष्ट्रपति प्रशासन के दिशानिर्देशों को लागू करने को कहा गया है. केन्द्रीय सरकार की तरफ से लॉकडाउन हटाने के तीनों चरणों को लागू करने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई. उसने केवल यह कहा है कि राज्य सरकारों को अपने यहां हर चरण के बीच कम से कम 14 दिनों का अंतर रखना होना.

योजना के पहले चरण के लिए दिशानिर्देशों में कहा गया कि अगर कोरोना वायरस के मामलों की संख्या में 14 दिनों तक गिरावट होती है तो राज्य घरों पर रहने का आदेश तथा अन्य पाबंदियों को हटा सकते हैं. इस दौरान दौरान स्कूल और दफ़्तर बंद रखे जाएंगे. राज्य अपने मुताबिक बाजार खोल सकते हैं. अगर इस क़दम के बाद भी राज्यों में संक्रमण के मामलों में कमी देखी जाती है तो राज्य दूसरे चरण को लागू करने के बारे में विचार कर सकते हैं. इसके तहत सीमित संख्या में कर्मचारियों के साथ कुछ दफ़्तरों को खोलने की इजाज़त दी जा सकती है. हालांकि, दूसरे चरण के दौरान भी 50 से अधिक लोगों के एक जगह पर जमा होने पर पाबंदी जारी रहेगी. राज्य सरकारें तीसरे चरण में सभी दफ़्तरों को सामान्य रूप से काम करने की इजाज़त दे सकती हैं और इस दौरान अस्पतालों और बुज़ुर्गों के केयर होम में भी लोगों की आवाजाही पर लगी पाबंदी हटाई जा सकती है.

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लॉकडाउन हटाने की घोषणा किए जाने के बाद अमेरिका के कई राज्यों ने लॉकडाउन में रियायत दे दी. इनमें से करीब 30 राज्यों ने कोरोना वायरस के मामलों की संख्या में 14 दिनों तक गिरावट न होने के बावजूद लॉकडाउन हटाने का आदेश दिया. ऐसा करने वाले अधिकांश राज्यों में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है. अमेरिकी राज्य जॉर्जिया के रिपब्लिकन गवर्नर और पूर्व व्यवसायी ब्रायन केम्प ने सबसे पहले 24 अप्रैल को सैलून, पार्लर, टैटू की दुकानें और जिम खोलने की अनुमति दी. उन्होंने ऐसा तब किया, जब जॉर्जिया में एक लाख टेस्ट होने के बाद 21 फीसदी लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे और टेस्ट की कमी के चलते गवर्नर की आलोचना हो रही थी. केंद्रीय सरकार के दिशानिर्देशों को ताक पर रखकर ब्रायन केम्प ने 27 अप्रैल से जॉर्जिया में रेस्टोरेंट खोलने का आदेश भी जारी कर दिया, लेकिन हैरानी की बात तब हुई जब राज्य के सबसे बड़े 120 रेस्टोरेंट मालिकों ने कोरोना के खतरे के चलते अपने प्रतिष्ठान खोलने से इनकार कर दिया.

डोनाल्ड ट्रंप के लॉकडाउन खोलने के फैसले को अमेरिका के ही 20 से ज्‍यादा महामारी विशेषज्ञों ने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा बताया है. इनका कहना है कि इस समय अमेरिका को लॉकडाउन खोले बिना कोरोना से लड़ने के लिए अपने स्वास्थ्य ढांचे को दुरुस्त करने की जरूरत है. ब्रिटेन के इम्पीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं के मुताबिक अमेरिका में सितंबर तक कोरोना वायरस के संक्रमण से करीब 22 लाख मौतें हो सकती हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी कुछ शोधकर्ताओं के हवाले से बताया है कि गलत समय पर लॉकडाउन खोलने के चलते अमेरिका में एक जून के बाद से हर रोज औसतन तीन हजार लोगों की कोरोना से मौत हो सकती है.