केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपनी चौथी प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 20 लाख करोड़ रु के उस पैकेज के कुछ और बिंदुओं का ब्योरा दिया जिसका ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोर बुनियादी ढांचे के सुधारों पर रहा. वित्त मंत्री ने कहा कि निवेश तेजी से बढ़े, इसके लिए सरकार नीतिगत सुधार करेगी. उनके मुताबिक सचिवों का एक विशेष समूह बनाया जाएगा. इसके अलावा हर मंत्रालय में एक प्रोजेक्ट डेवलपमेंट इकाई बनेगी. निवेश के लिए आकर्षक माहौल बनाने के पैमाने पर राज्यों की रैंकिंग भी होगी.

वित्त मंत्री ने कहा कि कोयला, खनिज पदार्थ, रक्षा विनिर्माण, एयरोस्पेस मैनेजमेंट, अंतरिक्ष और आणविक ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश पर विशेष जोर रहेगा. निर्मला सीतारमण के मुताबिक कोयला खनन में कमर्शियल गतिविधि के लिए छूट दी जाएगी ताकि सरकारी एकाधिकार ख़त्म हो. वित्त मंत्री ने कहा कि जल्द ही 50 खनन ब्लाक नीलामी के लिए खोले जाएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार खनन से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए 50 हजार करोड़ रु देगी. निर्मला सीतारमण के मुताबिक खनिज क्षेत्र में भी निजी निवेश में बढोत्तरी पर ध्यान दिया जाएगा. इस क्षेत्र में ढांचागत सुधार किए जाएंगे ताकि इसका विकास हो और नतीजतन रोजगार बढ़ें.

वित्त मंत्री के मुताबिक रक्षा उत्पादन में मेक इन इंडिया पर जोर रहेगा. उनका कहना था कि ऐसे हथियारों और उपकरणों की सूची बनाई जाएगी जिनका भारत में ही उत्पादन किया जा सकता है और इनके आयात पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड का कॉरपोरेटाइजेशन होगा. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि ऑटोमैटिक रूट के तहत रक्षा उत्पादन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की सीमा 49 से बढ़ाकर 74 फीसदी की जाएगी.

निर्मला सीतारमण के मुताबिक नागर विमानन क्षेत्र के विकास पर भी खास ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारतीय एयरस्पेस के इस्तेमाल पर लगी कई पाबंदियां हटाई जाएंगी. अभी देश के एयरस्पेस का सिर्फ 60 फीसदी हिस्सा आजादी के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. इस आंकड़े को बढ़ाया जाएगा. निर्मला सीतारमण ने कहा कि इससे उड़ान में लगने वाला समय और ईंधन घटेगा और इस क्षेत्र को हर साल 1000 करोड़ रु का फायदा होगा. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि निजी-सार्वजनिक भागीदारी यानी पीपीपी माध्यम से 12 हवाई अड्डों के लिए करीब 13 हजार करोड़ रु का निवेश आएगा. उनके मुताबिक विमान रखरखाव, मरम्मत इत्यादि के लिए भारत एक वैश्विक केंद्र बनेगा. उनके मुताबिक अगले साल दुनिया के प्रमुख विमान इंजन निर्माता भारत में इनकी मरम्मत के लिए इकाइयां लगाने जा रहे हैं.