1- कोरोना वायरस संकट से जूझती अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हफ्ते 20 लाख करोड़ रु के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया. इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसका ब्योरा दिया. यह रकम देश की जीडीपी का करीब 10 फीसदी है. क्या इससे समस्या हल हो जाएगी? द प्रिंट हिंदी पर योगेंद्र यादव की टिप्पणी.

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2- कोरोना वायरस संकट के चलते मार्च में घोषित लॉकडाउन के बाद से देेश की सड़कों पर अपने घर लौटते मजदूरों का तांता लगा हुआ है. इनकी मुश्किलों की चौतरफा खबरों के बाद इस हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि सरकार आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए अगले दो महीने तक खाने का इंतजाम कर रही है. इसके लिए 3500 करोड़ रुपये की राशि का ऐलान किया गया. जानकारों के मुताबिक सरकार को चिंता है कि अगर मज़दूर वापस न आए तो अर्थव्यवस्था का क्या होगा. बीबीसी हिंदी पर सरोज सिंह की रिपोर्ट.

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3- देश भर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों के अधिकतर संसाधन कोविड-19 से निपटने में लगे हैं. कई जगहों पर ओपीडी और गंभीर बीमारियों से संबंधित विभाग बंद हैं और इमरजेंसी में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं. ऐसे में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीज़ और उनके परिजनों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. द वायर हिंदी पर मीनाक्षी तिवारी की रिपोर्ट.

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4- कोरोना वायरस से उपजी महामारी कोविड-19 ने हर क्षेत्र पर अपना असर डाला है. खेल और खिलाड़ी भी इससे अछूते नहीं रहे. दुनिया भर की तमाम अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को अगले साल तक बढ़ा दिया गया है जिनमें टोक्यो ओलंपिक भी शामिल है. इनकी तैयारी कर रहे खिलाड़ी इस पर क्या सोचते हैं. डॉयचे वेले हिंदी पर विवेक शर्मा की रिपोर्ट.

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5- कोरोना वायरस के देश में बढ़ते मामलों के बीच कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के आगरा मॉडल की खूब चर्चा हुई थी. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्‍त सच‍िव लव अग्रवाल ने अपनी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में भी इस शहर में संक्रमण पर काबू पाए जाने की कोशिशों की तारीफ की थी. लेकिन अब यहां कोरोना वायरस के मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है. इसके चलते अब अध‍िकारियों पर कार्रवाई भी होने लगी है. डाउन टू अर्थ हिंदी पर रणविजय सिंह की रिपोर्ट.

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