60 से ज्यादा उन देशों की सूची में अब भारत भी शामिल हो गया है कोरोना वायरस संकट की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं. यह मुद्दा सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने उठाया था. बाद में यूरोपीय संघ भी इसमें शामिल हो गया. इन सभी की मांग है कि यह जांच जल्द से जल्द शुरू की जाए और पता लगाए जाए कि मनुष्यों तक कोरोना वायरस कैसे पहुंचा.

बीते दिसंबर में चीन के हूबे प्रांत में स्थित वुहान शहर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सामने आये थे. इसके बाद से यह तेजी से चीन के बाहर भी फैला. अब तक कोरोना वायरस पूरी दुनिया में सवा तीन लाख लोगों की जान ले चुका है जबकि 47 लाख से ज्यादा लोग इसकी चपटे में हैं. अकेले अमेरिका में इस वायरस के संक्रमण के चलते अब तक 89 हजार मौतें हो चुकी हैं.

माना जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया को यह अंतरराष्ट्रीय समर्थन चीन को अलग-थलग करने के लिए मिल रहा है. असल में बीते महीने जब ऑस्ट्रेलिया ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी तो चीन ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया था. यही नहीं, उसने ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार पर कुछ प्रतिबंधों की घोषणा कर दी थी.

कोरोना वायरस को लेकर ये आरोप भी लग रहे हैं कि यह चीन की एक लैब में बना है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो इसे कई बार चीनी वायरस कह चुके हैं. उधर, चीन ने इस पर कड़ा एतराज जताया है. उसका कहना है कि दूसरों की तरह वह भी कोरोना वायरस से पीड़ित है.