कुछ राज्यों द्वारा श्रमिक ट्रेनों को अपने यहां आने की अनुमति न दिए जाने की वजह से अब रेलवे ने राज्यों की इजाजत के बिना ट्रेनें चलाने का फैसला किया है. रेलवे ने कहा है कि अब उसे ट्रेनों के संचालन के लिए संबंधित राज्यों की अनुमति की जरूरत नहीं है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रवासियों को ट्रेनों से उनके गृह राज्यों में पहुंचाने के मकसद से रेलवे के लिए नयी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है. रेलवे के प्रवक्ता राजेश बाजपेई ने कहा, ‘श्रमिक विशेष ट्रेनों को चलाने के लिए अब उन राज्यों की सहमति की आवश्यकता नहीं है, जहां यात्रा समाप्त होनी है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘नई एसओपी जारी होने के बाद अब राज्य की सहमति लेने की जरूरत खत्म हो गयी है.’

बीते एक मई को भारतीय रेलवे ने लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया था. लेकिन, इसके लिए उस राज्य की इजाजत जरूरी होती थी, जहां ट्रेन को पहुंचना होता था. बीते हफ्ते केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ ने अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम श्रमिक ट्रेनों को मंजूरी दी है, जिस वजह से इन राज्यों के प्रवासी मजदूरों को ट्रेनों के जरिये नहीं भेजा जा पा रहा है. रेलवे ने देश भर में अब 1,500 से ज्यादा श्रमिक ट्रेनों का परिचालन किया है और इनके जरिये 20 लाख से अधिक प्रवासियों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाया है.