मुंबई से गोरखपुर जाने वाली एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन ओडिशा के राउरकेला पहुंचने पर रेलवे ने सफाई दी है. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने कहा कि ऐसा नेटवर्क पर भीड़ होने के चलते ट्रेन का रूट बदले जाने से हुआ. उनका कहना था, ‘उत्तर प्रदेश और बिहार की तरफ ट्रेनों की अधिक संख्या रहती है. ऐसे में इन मार्गों पर भीड़ अधिक होती है. इसी वजह से हमने कुछ ट्रेनों को दूसरे रूट से ले जाने का फैसला किया.’ उन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया. विनोद कुमार यादव का कहना था कि ट्रैफिक जाम में खड़े रहने से अच्छा है कि थोड़ा लंबा रूट लेकर तेजी से पहुंच जाएं.

खबरों के मुताबिक भारतीय रेलवे के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि चलती हुई ट्रेन का रास्ता बदल दिया गया हो और यात्रियों को इसकी जानकारी न दी गई हो. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब परेशान यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा की. एक यात्री ने ट्विटर पर लिखा, ‘हम 21 मई को गोरखपुर वापस जाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सवार हुए थे. 23 घंटे की यात्रा के बाद भी हम महाराष्ट्र में हैं. हमारे पास खाने के लिए कुछ नहीं है और न ही पानी है. ट्रेन भुसावल से नागपुर की ओर क्यों जा रही है?’ कुछ यात्रियों के मुताबिक राउरकेला में अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कुछ गफलत के चलते ट्रेन का ड्राइवर रास्ता भटक गया.

प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए रेलवे ने एक मई से विशेष श्रमिक ट्रेनें शुरू की हैं. अब तक 2,317 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से 31 लाख प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा चुका है. रेलवे का कहना है कि ये ट्रेनें तब तक जारी रहेंगी जब तक इनकी जरूरत खत्म नहीं होती.