1- कोरोना वायरस संकट ने चौतरफा चुनौतियां पैदा कर दी हैं. इस महामारी का असर समाज से लेकर अर्थव्यवस्था तक हर तरफ देखा जा रहा है. भारत के सबसे अमीर मंदिर भी इससे अछूते नहीं हैं. बीबीसी पर इमरान कुरैशी की रिपोर्ट.

कोरोना लॉकडाउन: देश के सबसे अमीर मंदिर में भी अब पैसे का संकट

2- पड़ोसी नेपाल के साथ भारत के रिश्ते बीते कुछ समय के दौरान उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं. पहले कालापानी को लेकर सीमा विवाद हुआ और लिपुलेख में बनी सड़क पर नेपाल ने ऐतराज जताया. द प्रिंट हिंदी पर अपनी इस टिप्पणी में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य शेषाद्री चारी का कहना है कि इस विवाद का लेना-देना असल में भारत के इस पड़ोसी देश की अंदरूनी राजनीति से है.

नेपाल का नक्शा नहीं, असल विवाद केपी ओली के कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर चल रहा है

3- मौजूदा संकट की कहानी दुनिया के अंतिम विशाल साम्राज्य ब्रितानी हुकूमत के एक खास विचार की वजह से लाखों लोगों के भुखमरी के कगार पर पहुंचने की कहानी से मेल खाती है. क्लासिकल इकॉनॉमिक्स नाम के इस विचार की कहानी का सबक यह है कि आर्थिक रूढ़िवाद आज भी उतना ही घातक साबित हो सकता है. डाउन टू अर्थ पर जस्टिन पोदुर की टिप्पणी.

कोरोना से विज्ञान बचाएगा, रूढ़िवादिता नहीं

4- कोरोना वायरस से उपजे हालात से निपटने के लिए मोदी सरकार ने पिछले दिनों 20 लाख करोड़ रु के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया. लेकिन आरोप लग रहे हैं कि इसमें राहत से ज्यादा कर्ज बांटने पर जोर है. द वायर हिंदी पर अपनी इस टिप्पणी में राजीव त्यागी का मानना है कि इस संकट से पहले ही अर्थव्यवस्था कर्ज के दलदल में फंस चुकी थी और नए कर्ज बांटने से इसका बुरा हाल होना तय है.

क्या मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत बनाने की बजाय क़र्ज़ निर्भर भारत बनाना चाहती है?

5- कोरोना वायरस संकट के बाद दुनिया के कई अमीर देश चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाह रहे हैं. माना जा रहा है कि भारत के हाई टेक मैन्युफैक्चरिंग उद्योग को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कहते रहे हैं कि इस संकट को अवसर में बदला जा सकता है. क्या ऐसा होगा? डॉयचे वेले पर टिमोथी कुक रिपोर्ट.

‘मेक इन इंडिया’ को कितना फायदा मिल सकता है चीन के नुकसान का