1- कोरोना वायरस संकट ने मोदी सरकार के लिए चौतरफा चुनौतियां पैदा की हैं. उधर, द प्रिंट हिंदी पर शिवम विज मानते हैं कि विपक्षी कांग्रेस के लिए यह संकट खुद में जान फूंकने का अवसर बन सकता था अगर वह प्रवासी मजदूरों की व्यथा को लेकर ठीक से काम कर पाती, लेकिन उसने यह अवसर गंवा दिया.

कांग्रेस तीन पार्टियों में बंटी हुई है, लेकिन एक को भी ठीक से राजनीति करनी नहीं आती

2- अमेरिका के मिनेपॉलिस समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर हैं. उनकी नाराजगी एक वीडियो क्लिप के वायरल होने के बाद सामने आई है जिसमें एक गोरा पुलिस अधिकारी जॉर्ज फ्लॉयड नाम के एक निहत्थे काले व्यक्ति की गर्दन पर घुटना टेककर उसे दबाता दिखता है. इसके कुछ ही मिनटों बाद 46 साल के जॉर्ज फ्लॉयड की मौत हो गई थी. इस पूरे मसले को लेकर बीबीसी पर विनीत खरे की रिपोर्ट.

जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद काले-गोरे पर सियासत गर्म

3- बीते दिनों घोषित 20 लाख करोड़ रु के आर्थिक पैकेज में मोदी सरकार ने किसानों के लिए भी बड़े ऐलान किए हैं. इनमें कृषि बाजारों के सुधार की बात भी है. न्यूजलॉन्ड्री हिंदी पर विवेक मिश्रा की यह रिपोर्ट बताती है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऐसा बाजार कहीं नहीं है जो आसानी से उपलब्ध हो और उन्हें उनके उत्पाद की उचित कीमत देता हो.

भारत: 85 फीसदी किसानों के लिए 41 हजार कृषि बाजारों की जरूरत

4- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी पारी को इस हफ्ते एक साल हो गया. डॉयचे वेले हिंदी पर अपनी इस टिप्पणी में महेश झा मानते हैं कि मोदी 2.0 राजनीतिक हिम्मत और व्यावहारिक मुश्किलों की कहानी है, लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष के कमजोर होने का असर लोकतंत्र की काया पर भी दिखा है.

दूसरे कार्यकाल में कितना बदल गए हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

5- सूक्ष्म,लघु और मध्यम उपक्रम यानी एमएसएमई क्षेत्र के लिए सरकार ने हाल में तीन लाख करोड़ रुपये के गारंटी फ्री लोन का ऐलान किया है. उम्मीद की जा रही है कि यह बेरोजगारी के संकट को ख़त्म करने में मददगार साबित होगा. लेकिन इस क्षेत्र के हालात ऐसे नहीं है कि सिर्फ एक लोन पैकेज से तस्वीर बदल जाए. द वायर हिंदी पर दीपक के. मंडल की रिपोर्ट.

एमएसएमई क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा दिया जा रहा गारंटी फ्री लोन समस्या का समाधान नहीं है