लॉकडाउन के दौरान कामगारों को वेतन देने के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 12 जून के लिए सुरक्षित रख लिया है. यह आदेश केंद्र सरकार ने 29 मार्च को दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा कि फैसला आने तक आदेश का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि 54 दिन के लॉकडाउन के दौरान वेतन देने के इस मुद्दे पर कंपनियों और कामगारों के बीच कुछ मोलभाव होना जरूरी है.

उधर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने फैसले को सही ठहराया. उसका कहना था कि जो कंपनियां यह कह रही हैं कि वे वेतन देने में सक्षम नहीं हैं उनकी ऑडिटेड बैलेंस शीट और खातों की जानकारी अदालत में पेश करने को कहा जाए. सरकार के मुताबिक यह आदेश इस मुश्किल वक्त के दौरान खासकर ठेके पर और बिना अनुबंध के काम कर रहे कामगारों के संकट कम करने के लिए जरूरी था.

15 मई को इससे पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मुद्दे पर फैसला देने से पहले कुछ बड़े सवालों का जवाब मिलना जरूरी है. अदालत के मुताबिक हो सकता है कि कुछ छोटी कंपनियों की कमाई बंद हो गई हो और इसलिए वे कामगारों को वेतन देने में सक्षम न हों. सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक ऐसे में ये कंपनियां सरकार की मदद के बिना उसके आदेश का पालन नहीं कर सकतीं.