1-सीमा पर चल रहे तनाव को कम करने के लिए आज भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच एक अहम बैठक हो रही है. यह बातचीत दोनों देशों के लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारी कर रहे हैं. इससे पहले मंगलवार को मेजर जनरल स्तर के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई थी लेकिन, यह किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी. दोनों देश कूटनीतिक स्तर पर भी मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.

2-भारत और चीन के बीच करीब साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबी सीमा है. हालांकि चीन इसे लगभग दो हजार किलोमीटर बताता है. बीते कुछ समय से लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं का जमावड़ा बढ़ा है. सैनिकों के बीच आपसी झड़पें भी हुई हैं. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन लद्दाख के पास एक एयरबेस का विस्तार कर रहा है. तस्वीरों से यह भी खुलासा होता है कि चीन ने वहां लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं.

3-यह पहली बार है, जब दोनों देशों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत सीमा चौकी पर हो रही है. आमतौर पर ऐसी चौकियों पर ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी स्थानीय तनाव कम करने के लिए मिलते हैं. बातचीत भारत की पहल पर हो रही है इसलिए इसका आयोजन वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के पास चुशूल-मोल्दो नामक जगह पर स्थित भारतीय बॉर्डर प्वाइंट मीटिंग हट में हो रहा है.

4-बीते कुछ समय से एलएसी पर चीन के अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ती गई हैं. पहले यह आंकड़ा साल में औसतन सौ बार होता था. अब यह छह सौ तक पहुंच गया. दोनों देशों के सैनिकों के बीच धक्कामुक्की और हाथापाई की घटनाएं भी बढ़ी हैं.

5-जानकारों के मुताबिक विवाद मुख्य तौर पर लद्दाख की पैंगॉन्ग झील और पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी के संवेदनशील इलाकों को लेकर है. हालांकि राहत की बात यह है कि दोनों ही पक्षों के सैनिक गलवान घाटी में वहां से पीछे हटे हैं जहां वे चार मई को भिड़े थे. हालांकि चीन के सैनिक पूर्वी लद्दाख के फिंगर नाम के उस इलाक़े में डटे हुए हैं, जहां पर पहले भारत का नियंत्रण रहा था. पांच मई को यहां भी सैनिकों के बीच धक्कामुक्की और पथराव हुआ था.