1-कोरोना वायरस संकट ने दुनिया को कई तरह से बदल दिया है. लेकिन इससे सिर्फ हमारा वर्तमान ही नहीं भविष्य भी बदलने जा रहा है. इसी बदलाव के एक पहलू पर बीबीसी हिंदी का लेख.

कोरोना वायरस: भविष्य में होने वाली यात्राएं कैसी होंगी?

2-लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन की शनिवार को एक अहम बैठक हुई. यह पहली बार था जब दोनों पक्षों के लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारी किसी सैन्य चौकी पर मिले. इससे पहले बीते एक महीने से दोनों देशों की सेनाओं के बीच लगातार झड़पों की खबरें आ रही थीं. इस पूरे विवाद को लेकर द प्रिंट हिंदी पर ले.ज.(रिटायर्ड) एचएस पनाग की टिप्पणी.

भारत के ‘फिंगर्स क्षेत्र’ चीनी बूटों के नीचे आ चुके हैं, नकारने से बात नहीं बनेगी

3- शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर भारत और चीन कोरोना वायरस की टेस्टिंग बढ़ाएं तो वहां अमेरिका से कहीं ज्यादा मामले निकल आएंगे. उधर, जैसे जैसे भारत तालाबंदी की छाया से बाहर आ रहा है, कई राज्यों से अचानक जांच में कमी होने की खबरें आ रही हैं. क्या इससे स्थिति का सही अनुमान लगाना संभव हो पाएगा? डॉयचे वेले हिंदी पर चारु कार्तिकेय की रिपोर्ट.

क्या कई राज्यों में कोविड-19 की जांच की गति में कमी आई है?

4-बीते दिनों भारत-नेपाल के बीच कालापानी नाम के एक इलाके को लेकर विवाद हो गया. नेपाल ने इसे अपना हिस्सा बताया जबकि भारत ने इससे इनकार किया. यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब भारत ने इलाके में एक सड़क का उद्घाटन किया. इस मुद्दे को लेकर दैनिक भास्कर पर राहुल कोटियाल की रिपोर्ट.

नेपाल के गांववाले राशन भारत से ले जाते हैं और भारत के कई गांव फोन पर नेपाल के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं

5-क्या नरेंद्र मोदी सरकार ने कोरोना के खिलाफ देश की जंग के किसी तार्किक परिणति तक पहुंचने से पहले ही मोर्चा छोड़ दिया है? लॉकडाउन के शुरू में जहां प्रधानमंत्री कोरोना को 21 दिनों में ही जीत लेने का दावा कर रहे थे, वहीं उसके पांचवें चरण में वे हताश-निराश ‘लंबी लड़ाई’ की बात कहते और प्राथमिकताएं बदलते दिखाई देते हैं. द वायर हिंदी पर कृष्ण प्रताप सिंह की टिप्पणी.

क्या नरेंद्र मोदी सरकार ने कोरोना से जंग का मोर्चा छोड़ दिया है?