ग्रीस संकट टला | सोमवार, 13 जुलाई 2015
यूरोपीय संघ द्वारा ग्रीस को बेलआउट पैकेज देने पर सहमति जताने के साथ ही महीनों से चला आ रहा ‘ग्रीस संकट’ फिलहाल थम गया. यूरोजोन के देशों और ग्रीस के बीच लगभग 18 घंटे तक चली बैठक के बाद दोनों पक्ष इस ‘बेलआउट’ पैकेज पर राजी हो गए. आर्थिक संकट में पड़ने के बाद से अंतर्राष्ट्रीय कर्जदाताओं की तरफ से उसे दिया जाने वाला यह तीसरा बेल आउट पैकेज है. यह पैकेज पाने के लिए दो दिन पहले ही ग्रीस ने यूरोजोन के सामने अंतिम प्रस्ताव रखा था. इसके तहत उसने बेलआउट के एवज में अपने तमाम खर्चों में कटौती करने से साथ ही अलग अलग क्षेत्रों में वैट बढाने संबंधी यूरोजोन की शर्तें मान ली थीं. यूरोजोन के साथ समझौता होने के बाद ग्रीस को अगले तीन सालों में लगभग 8000 करोड़ यूरो की मदद मिलने की उम्मीद है.
ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर समझौता | मंगलवार, 14 जुलाई 2015
ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को लेकर उसके और दुनिया के बड़े ताकतवर देशों के बीच समझौता हो गया. इसके तहत ईरान खुद पर लगे तमाम तरह के प्रतिबंधों को कम किये जाने के एवज में अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमाओं में बांधने के लिए तैयार हो गया है. समझौते के मुताबिक अगले 15 साल तक ईरान कोई परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस समझौते को बहुत बड़ी उपलब्धि बताया है. ओबामा ने समझौते पर अड़ंगा लगाने वाली किसी भी कोशिश के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात भी कही. 20 महीने की कड़ी मशक्कत के बाद यह समझौता अंतिम नतीजे पर पहुंच सका है. इस समझौते के बाद दुनिया में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उपजी आशंकाएं कम हुई हैं तो दूसरी तरफ ईरान भी खुद पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों के हटने से राहत महसूस कर रहा है.
नासा का ‘मिशन प्लूटो’ कामयाब हुआ | बुधवार, 15 जुलाई 2015
अंतरिक्ष यान ‘न्यू होराइजन्स’ द्वारा धरती पर प्लूटो की पहली तस्वीर भेजे जाने के साथ ही अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की नौ सालों की अथक मेहनत आखिरकार रंग ले आई. यान द्वारा भेजी गई तस्वीरों से बौने ग्रह के नाम से मशहूर प्लूटो के आकार और बनावट को लेकर नई जानकारी सामने आई है. इसके मुताबिक प्लूटो का अनुमानित व्यास लगभग 2200 किलोमीटर है. यह संख्या अब तक ज्ञात जानकारी से लगभग 80 किलोमीटर ज्यादा है. ‘न्यू होराइजन्स’ ने प्लूटो से लगभग साढे़ बारह हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरते हुए ये तस्वीरें खींचीं.
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार देश से बाहर लड़ सकेगी जापानी सेना | गुरूवार, 16 जुलाई 2015
जापान की संसद के निचले सदन ने वहां की सेना के अधिकारों को बढ़ाते हुए उसे देश से बाहर होने वाली ‘सैन्य गतिविधियों’ में शामिल होने की मंजूरी दे दी. जापान की रक्षानीति में बदलाव लाने वाले एक विधेयक को विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद सदन में पास कर दिया गया. अब यह विधेयक ऊपरी सदन में रखा जाएगा जहां से इसे मंजूरी मिलते ही सेना को देश के बाहर होने वाली किसी भी लड़ाई में शामिल होने का अधिकार मिल जाएगा. यदि ऐसा हुआ तो दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पहली बार जापानी सैनिक किसी दूसरे देश की जमीन पर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकेंगे. जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे द्वारा इस विधेयक को राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती देने वाला बताए जाने के बावजूद वहां के आम नागरिक इसको लेकर खुश नहीं हैं.
मलेशियाई विमान हादसे में रूस का हाथ? | शुक्रवार, 17 जुलाई 2015
साल भर पहले यूक्रेन में दुर्घटनाग्रस्त हुए मलेशिया के यात्री विमान एमएच-17 का एक नया वीडियो सामने आया है जिससे इस हादसे के पीछे रूस का हाथ होने की संभावनाएं और पुख्ता लग रही हैं. इस वीडियो में रूस समर्थक यूक्रेन विद्रोहियों को इस बात पर निराशा जताते हुए देखा जा रहा है कि यह लड़ाकू नहीं बल्कि यात्री विमान था. वीडियो में दिख रहे विद्रोही मलबे की पड़ताल करते हुए रूसी भाषा में बात कर रहे हैं. टेलीग्राफ द्वारा जारी किया गया यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है. मलेशियन एयरलाइन का यह विमान ठीक एक साल पहले 17 जुलाई 2014 को रूस की सीमा से लगभग 40 किलोमीटर दूर यूक्रेन में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में चालक दल के सदस्यों सहित सभी 298 यात्री मारे गए थे. उस वक्त यूक्रेन ने रूस समर्थक विद्रोहियों पर इसे मिसाइल से मार गिराने का आरोप लगाया था. रूस ने इसके उलट यूक्रेन की सेना को इसके लिए जिम्मेदार बताया था.
चीनी मीडिया ने पाकिस्तान का दावा झुठलाया | शनिवार, 18 जुलाई 2015
जिस ड्रोन को भारत का बताते हुए पाकिस्तान ने अपनी सीमा के अंदर मार गिराने का दावा किया था, उसे चीन ने अपने देश में निर्मित बता कर भारत के दावे और पाकिस्तान के झूठ पर मुहर लगा दी. चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के अखबार पीपुल्स डेली में छपी रिपोर्ट के मुताबिक डीजेआई फैंटम 3 नामक यह ड्रोन राजधानी बीजिंग की एक कंपनी द्वारा बनाया गया है. अखबार के मुताबिक हालिया समय में उपलब्ध सभी ड्रोनों में सबसे उन्नत तकनीक वाला यह ड्रोन सबसे सुलभ भी है. अखबार ने एक चीनी बेवसाइट का हवाला देते हुए इस ड्रोन की कीमत 1,200 डॉलर बताई है. इस खुलासे के बाद जहां पाकिस्तान का दावा पूरी तरह जमीन पर आ गया है, वहीं भारत द्वारा अपने ऊपर लगे आरोपों के जवाब में दी गई दलील भी सही साबित हो गई है.