पेट्रोल-डीज़ल की लगातार बढ़ती क़ीमतों पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. कांग्रेस अध्यक्ष ने इस पत्र में केंद्र सरकार को पूरी तरह असंवेदनशील बताते हुए लिखा है, ‘देश इस समय अभूतपूर्व स्वास्थ्य, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. लेकिन इस मुश्किल वक़्त में भी सरकार ने कम से कम दस बार पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों को बढ़ाया है. ये बात बहुत परेशान करने वाली है.’

सोनिया गांधी ने आगे लिखती हैं, ‘कोविड-19 की वजह से करोड़ों लोग नौकरियों से हाथ धो बैठे हैं. छोटे-बड़े व्यवसाय तबाह हो गए हैं. मध्यम वर्ग की आय लगातार घटती जा रही है. यहां तक कि किसान भी ख़रीफ़ की फसल की बुवाई के लिए तमाम मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. ऐसे हालात में तेल की क़ीमतें बढा़ने का केंद्र सरकार का फ़ैसला समझ से परे है.’

कांग्रेस अध्यक्ष इस चिट्ठी में दावा करती हैं कि ‘बीते छह साल में तेल की क़ीमतें सबसे निचले स्तर पर रही हैं. लेकिन केंद्र सरकार अब तक 12 चरणों में पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज़ ड्यूटी को 258 प्रतिशत और डीज़ल पर लगने वाली एक्साइज़ ड्यूटी को 820 फ़ीसदी तक बढ़ा चुकी है. बीते एक सप्ताह में कच्चे तेल की क़ीमतों में नौ फ़ीसदी की कमी आई है. लेकिन सरकार ने इस फ़ायदे को लोगों तक पहुंचाने की बजाय उनकी जेब पर अतिरिक्त वज़न डाल दिया, ताकि उसे 2,60,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सके.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में की गई बढ़ोतरी को वापिस लेने की गुज़ारिश करते हुए सोनिया गांधी लिखती हैं, ‘ऐसे समय में जब लोग अकल्पनीय परेशानियों का सामना कर रहे हैं. अनिश्चितता और भय उन्हें हर तरफ़ से घेरे हुए है. तब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह लोगों की मुश्किलें कम करे. लेकिन इस तरह के अनुचित फ़ैसले लेकर आप ने तो लोगों की पीड़ा को और ज़्यादा बढ़ाने का काम किया है.’